Correct Answer:
Option D - ब्रूनर के अनुसार बालक की मानसिक अनुभूतियों का तरीका मूर्त संक्रियात्मक नहीं है।
ब्रूनर के अनुसार शिशु अपनी अनुभूतियों का मानसिक रूप से तीन तरीकों से अभिव्यक्त करते हैं-
1. सक्रियता विधि - विधि में शिशु अपनी अनुभूतियों को शब्दहीन क्रियाओं के द्वारा करता है। जैसें भूख लगने पर रोना।
2. दृश्य प्रतिमा विधि- इस विधि में बालक अपनी अनुभूतियों को अपने मन में कुछ दृश्य प्रतिमाएँ टपेनंस पउंहमभेद्ध- बनाकर प्रकट करता है। इस अवस्था में बच्चा प्रत्यक्षीकरण के माध्यम से सीखता है।
3. सांकेतिक विधि- इस विधि में बालक अपनी अनुभूतियों को ध्वन्यात्मक संकेतों (भाषा) के माध्यम से व्यक्त करता है। इस अवस्था में बालक अपने अनुभवों को शब्दों में व्यक्त करता है। इस प्रकार बालक प्रतीकों का उनके मूल विचारों से सम्बन्धित करने की योग्यता का विकास करता है।
D. ब्रूनर के अनुसार बालक की मानसिक अनुभूतियों का तरीका मूर्त संक्रियात्मक नहीं है।
ब्रूनर के अनुसार शिशु अपनी अनुभूतियों का मानसिक रूप से तीन तरीकों से अभिव्यक्त करते हैं-
1. सक्रियता विधि - विधि में शिशु अपनी अनुभूतियों को शब्दहीन क्रियाओं के द्वारा करता है। जैसें भूख लगने पर रोना।
2. दृश्य प्रतिमा विधि- इस विधि में बालक अपनी अनुभूतियों को अपने मन में कुछ दृश्य प्रतिमाएँ टपेनंस पउंहमभेद्ध- बनाकर प्रकट करता है। इस अवस्था में बच्चा प्रत्यक्षीकरण के माध्यम से सीखता है।
3. सांकेतिक विधि- इस विधि में बालक अपनी अनुभूतियों को ध्वन्यात्मक संकेतों (भाषा) के माध्यम से व्यक्त करता है। इस अवस्था में बालक अपने अनुभवों को शब्दों में व्यक्त करता है। इस प्रकार बालक प्रतीकों का उनके मूल विचारों से सम्बन्धित करने की योग्यता का विकास करता है।