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Q: बालक को श्रवण कौशल में प्रवीण बनाने के लिए आवश्यक है–
  • A. कक्षा का वातावरण भय एवं आतंक से युक्त हो
  • B. श्रवणीय सामग्री बालकों के स्तर के अनुरूप, प्रसंगानुकूल व रोचक हो
  • C. श्रवणीय सामग्री आवश्यकता से अधिक हो
  • D. टेपरिकॉर्डर, ग्रामोफोन आदि का आश्रय न लेकर श्रवण कौशल का अभ्यास कराया जाये
Correct Answer: Option B - कक्षा का वातावरण भय एवं आतंक से युक्त होने पर श्रवण में मन ही नहीं लगेगा तथा श्रवणीय सामग्री आवश्यकता से अधिक होने पर उसमें से आवश्यक सामग्री के चयन में बाधा उत्पन्न होगी और टेपरिकार्डर तथा ग्रामोफोन आदि भी श्रवण कौशल के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं साथ ही श्रवणीय सामग्री का बालकों के स्तर के अनुरूप, प्रसंगानुकूल व रोचक होना श्रवण कौशल के विकास में सर्वाधिक महत्वपूर्ण है।
B. कक्षा का वातावरण भय एवं आतंक से युक्त होने पर श्रवण में मन ही नहीं लगेगा तथा श्रवणीय सामग्री आवश्यकता से अधिक होने पर उसमें से आवश्यक सामग्री के चयन में बाधा उत्पन्न होगी और टेपरिकार्डर तथा ग्रामोफोन आदि भी श्रवण कौशल के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं साथ ही श्रवणीय सामग्री का बालकों के स्तर के अनुरूप, प्रसंगानुकूल व रोचक होना श्रवण कौशल के विकास में सर्वाधिक महत्वपूर्ण है।

Explanations:

कक्षा का वातावरण भय एवं आतंक से युक्त होने पर श्रवण में मन ही नहीं लगेगा तथा श्रवणीय सामग्री आवश्यकता से अधिक होने पर उसमें से आवश्यक सामग्री के चयन में बाधा उत्पन्न होगी और टेपरिकार्डर तथा ग्रामोफोन आदि भी श्रवण कौशल के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं साथ ही श्रवणीय सामग्री का बालकों के स्तर के अनुरूप, प्रसंगानुकूल व रोचक होना श्रवण कौशल के विकास में सर्वाधिक महत्वपूर्ण है।