search
Q: ‘बलाबलेपादधुनाऽपि पूर्ववत् प्रबाध्यते तेन जगज्जिगीषुणा।। सतीव योषित्प्रकृति: सुनिश्चला पुमांसमभ्येति भवान्तरेष्वपि।।’ इत्यत्र कोऽलङ्कार:।
  • A. अर्थान्तरन्यास:
  • B. दीपकम्
  • C. दृष्टान्त:
  • D. विशेषोक्ति:
Correct Answer: Option A - ‘बलाबलेपादधुनाऽपि पूर्ववत् प्रबाध्यते तेज जगज्जिगीषुणा। सतीव योषित्प्रकृति: सुनिश्चला पुमांसमभ्येति भवान्तरेष्वपि।।’ इत्यत्र अर्थान्तरन्यास अलङ्कार: अस्ति। अर्थात् प्रस्तुत श्लोक महाकवि माघ द्वारा विरचित ‘शिशुपालवधम्’ नामक महाकाव्य के प्रथम सर्ग से अवतरित है इसमें अर्थान्तरन्यास अलङ्कार है। इसका उपजीव्य महाभारत का सभापर्वान्तर्गत अर्घारोहणपर्व तथा श्रीमद्भगवद्गीता पुराण का दशम स्कन्ध है। इनका सबसे प्रिय छन्द ‘अनुष्टुप्’ है तथा इनके उन्नीसवें सर्ग में चित्रालंकार का वर्णन है अत: विकल्प (a) सही है। लक्षण- सामान्यं वा विशेषो या तदन्येन समथ्र्यते। यत्तु सोऽर्थान्तन्यास: सा धर्म्येंणेतरेण वा।
A. ‘बलाबलेपादधुनाऽपि पूर्ववत् प्रबाध्यते तेज जगज्जिगीषुणा। सतीव योषित्प्रकृति: सुनिश्चला पुमांसमभ्येति भवान्तरेष्वपि।।’ इत्यत्र अर्थान्तरन्यास अलङ्कार: अस्ति। अर्थात् प्रस्तुत श्लोक महाकवि माघ द्वारा विरचित ‘शिशुपालवधम्’ नामक महाकाव्य के प्रथम सर्ग से अवतरित है इसमें अर्थान्तरन्यास अलङ्कार है। इसका उपजीव्य महाभारत का सभापर्वान्तर्गत अर्घारोहणपर्व तथा श्रीमद्भगवद्गीता पुराण का दशम स्कन्ध है। इनका सबसे प्रिय छन्द ‘अनुष्टुप्’ है तथा इनके उन्नीसवें सर्ग में चित्रालंकार का वर्णन है अत: विकल्प (a) सही है। लक्षण- सामान्यं वा विशेषो या तदन्येन समथ्र्यते। यत्तु सोऽर्थान्तन्यास: सा धर्म्येंणेतरेण वा।

Explanations:

‘बलाबलेपादधुनाऽपि पूर्ववत् प्रबाध्यते तेज जगज्जिगीषुणा। सतीव योषित्प्रकृति: सुनिश्चला पुमांसमभ्येति भवान्तरेष्वपि।।’ इत्यत्र अर्थान्तरन्यास अलङ्कार: अस्ति। अर्थात् प्रस्तुत श्लोक महाकवि माघ द्वारा विरचित ‘शिशुपालवधम्’ नामक महाकाव्य के प्रथम सर्ग से अवतरित है इसमें अर्थान्तरन्यास अलङ्कार है। इसका उपजीव्य महाभारत का सभापर्वान्तर्गत अर्घारोहणपर्व तथा श्रीमद्भगवद्गीता पुराण का दशम स्कन्ध है। इनका सबसे प्रिय छन्द ‘अनुष्टुप्’ है तथा इनके उन्नीसवें सर्ग में चित्रालंकार का वर्णन है अत: विकल्प (a) सही है। लक्षण- सामान्यं वा विशेषो या तदन्येन समथ्र्यते। यत्तु सोऽर्थान्तन्यास: सा धर्म्येंणेतरेण वा।