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Q: बाल विकास के समकालीन परिप्रेक्ष्य :
  • A. बच्चे को एक जैविक प्रवर्ग के रूप में देखते हैं।
  • B. बच्चे को एक दैहिक सत्व के रूप में देखते हैं।
  • C. बाल्यावस्था को विशिष्ट चरणों में विभाजित मानते हैं।
  • D. बाल्यावस्था को एक विशिष्ट सांस्कृतिक एवं सामाजिक संरचना मानते हैं।
Correct Answer: Option D - बाल विकास के समकालीन परिप्रेक्ष्य बाल्यावस्था को एक विशिष्ट सांस्कृतिक एवं सामाजिक संरचना मानते हैं। बाल्यावस्था में विशिष्ट सांस्कृतिक एवं सामाजिक संरचना की भूमिका विशेष महत्व रखती है। सांस्कृतिक और समाजिकता में गहरा सम्बन्ध है। सांस्कृतिक के किसी तल में किसी प्रकार का परिवर्तन होता है तो उसका प्रभाव समाजिकता पर निश्चित रूप से पड़ता है। बाल्यावस्था में बालकों के ऊपर सांस्कृतिक एवं सामाजिक संरचना का प्रभाव दिखने लगता है। बाल्यावस्था (6-12) वर्ष तक मानी जाती है।
D. बाल विकास के समकालीन परिप्रेक्ष्य बाल्यावस्था को एक विशिष्ट सांस्कृतिक एवं सामाजिक संरचना मानते हैं। बाल्यावस्था में विशिष्ट सांस्कृतिक एवं सामाजिक संरचना की भूमिका विशेष महत्व रखती है। सांस्कृतिक और समाजिकता में गहरा सम्बन्ध है। सांस्कृतिक के किसी तल में किसी प्रकार का परिवर्तन होता है तो उसका प्रभाव समाजिकता पर निश्चित रूप से पड़ता है। बाल्यावस्था में बालकों के ऊपर सांस्कृतिक एवं सामाजिक संरचना का प्रभाव दिखने लगता है। बाल्यावस्था (6-12) वर्ष तक मानी जाती है।

Explanations:

बाल विकास के समकालीन परिप्रेक्ष्य बाल्यावस्था को एक विशिष्ट सांस्कृतिक एवं सामाजिक संरचना मानते हैं। बाल्यावस्था में विशिष्ट सांस्कृतिक एवं सामाजिक संरचना की भूमिका विशेष महत्व रखती है। सांस्कृतिक और समाजिकता में गहरा सम्बन्ध है। सांस्कृतिक के किसी तल में किसी प्रकार का परिवर्तन होता है तो उसका प्रभाव समाजिकता पर निश्चित रूप से पड़ता है। बाल्यावस्था में बालकों के ऊपर सांस्कृतिक एवं सामाजिक संरचना का प्रभाव दिखने लगता है। बाल्यावस्था (6-12) वर्ष तक मानी जाती है।