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Q: ‘भाषा बहुत परिष्कृत और परिमार्जित न होने पर भी कबीर की उक्तियों में कहीं-कहीं विलक्षण प्रभाव और चमत्कार है। प्रतिभा उनमें प्रखर थी इसमें संदेह नहीं’–पंक्तियों के लेखक हैं।
  • A. डॉ नगेन्द्र
  • B. आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी
  • C. डॉ राममूर्ति त्रिपाठी
  • D. आचार्य रामचन्द्र शुक्ल
Correct Answer: Option D - ‘‘भाषा बहुत परिष्कृत और परिमार्जित न होने पर भी कबीर की उक्तियों में कहीं-कहीं विलक्षण प्रभाव और चमत्कार है। प्रतिभा उनमें प्रखर थी इसमें संदेह नहीं’’– यह कथन आचार्य रामचन्द्र शुक्ल का है, जो उन्होंने कबीरदास के सम्बन्ध में कहा है। आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी ने कबीर को ‘भाषा का डिक्टेटर’ कहा है। शुक्ल जी ने कबीर की भाषा को ‘सुधक्क्ड़ी’ कहा है।
D. ‘‘भाषा बहुत परिष्कृत और परिमार्जित न होने पर भी कबीर की उक्तियों में कहीं-कहीं विलक्षण प्रभाव और चमत्कार है। प्रतिभा उनमें प्रखर थी इसमें संदेह नहीं’’– यह कथन आचार्य रामचन्द्र शुक्ल का है, जो उन्होंने कबीरदास के सम्बन्ध में कहा है। आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी ने कबीर को ‘भाषा का डिक्टेटर’ कहा है। शुक्ल जी ने कबीर की भाषा को ‘सुधक्क्ड़ी’ कहा है।

Explanations:

‘‘भाषा बहुत परिष्कृत और परिमार्जित न होने पर भी कबीर की उक्तियों में कहीं-कहीं विलक्षण प्रभाव और चमत्कार है। प्रतिभा उनमें प्रखर थी इसमें संदेह नहीं’’– यह कथन आचार्य रामचन्द्र शुक्ल का है, जो उन्होंने कबीरदास के सम्बन्ध में कहा है। आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी ने कबीर को ‘भाषा का डिक्टेटर’ कहा है। शुक्ल जी ने कबीर की भाषा को ‘सुधक्क्ड़ी’ कहा है।