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Q: भाषा बहुत परिष्कृत और परिमार्जित न होने पर भी कबीर की उक्तियों में कहीं-कहीं विलक्षण प्रभाव और चमत्कार है। प्रतिभा उनमें प्रखर थी इसमें संदेह नहीं’- पंक्तियों के लेखक हैं
  • A. डॉ. नगेन्द्र
  • B. आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी
  • C. डॉ. राममूर्ति त्रिपाठी
  • D. आचार्य रामचन्द्र शुक्ल
Correct Answer: Option D - उपर्युक्त पंक्ति के लेखक आचार्य रामचन्द्र शुक्ल है। यह उक्त शुक्ल जी ने अपने ग्रंथ हिन्दी साहित्य का इतिहास में ज्ञानाश्रयी शाखा के निर्गुण भक्ति के प्रमुख कवि कबीरदास के बारे में कही है। इन्होंने कबीर की भाषा को सधुक्कड़ी या पंचमेल खिचड़ी कहा है। शुक्ल जी अपने ग्रंथ ‘हिन्दी साहित्य का इतिहास’ में कबीर को वह महत्वपूर्ण स्थान नहीं दिया है जो सूर, तुलसी और जायसी को दिया है।
D. उपर्युक्त पंक्ति के लेखक आचार्य रामचन्द्र शुक्ल है। यह उक्त शुक्ल जी ने अपने ग्रंथ हिन्दी साहित्य का इतिहास में ज्ञानाश्रयी शाखा के निर्गुण भक्ति के प्रमुख कवि कबीरदास के बारे में कही है। इन्होंने कबीर की भाषा को सधुक्कड़ी या पंचमेल खिचड़ी कहा है। शुक्ल जी अपने ग्रंथ ‘हिन्दी साहित्य का इतिहास’ में कबीर को वह महत्वपूर्ण स्थान नहीं दिया है जो सूर, तुलसी और जायसी को दिया है।

Explanations:

उपर्युक्त पंक्ति के लेखक आचार्य रामचन्द्र शुक्ल है। यह उक्त शुक्ल जी ने अपने ग्रंथ हिन्दी साहित्य का इतिहास में ज्ञानाश्रयी शाखा के निर्गुण भक्ति के प्रमुख कवि कबीरदास के बारे में कही है। इन्होंने कबीर की भाषा को सधुक्कड़ी या पंचमेल खिचड़ी कहा है। शुक्ल जी अपने ग्रंथ ‘हिन्दी साहित्य का इतिहास’ में कबीर को वह महत्वपूर्ण स्थान नहीं दिया है जो सूर, तुलसी और जायसी को दिया है।