Explanations:
भारतीय संविधान के अनुच्छेद-148 के तहत भारत का एक नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक होगा जिसकी नियुक्ति भारत के राष्ट्रपति द्वारा की जाएगी और उसे उसके पद से केवल उसी रीति से और उन्हीं आधारों पर हटाया जाएगा जिस रीति से और जिन आधारों पर उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश को हटाया जाता है। इसका कार्यकाल 6 वर्ष की अवधि या 65 वर्ष की आयु जो भी पहले हो तक होता है। नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक को ‘राष्ट्रीय वित्त’ का संरक्षक भी कहा जाता है। वह देश की समस्त वित्तीय प्रणाली पर नजर रखता है तथा कार्यपालिका के वित्तीय आदान-प्रदान का औचित्य तथा अनौचित्य तय करता है।