Correct Answer:
Option B - • दक्कन का पठार त्रिभुजाकार है, यह क्रमश: उत्तर से दक्षिण की ओर (महाराष्ट्र, म.प्र., छत्तीसगढ़, ओडिशा, आन्ध्र प्रदेश, तेलंगाना, कर्नाटक, तमिलनाडु) विस्तृत है।
• पश्चिमी सतपुड़ा, श्रेणी के उत्तर में नर्मदा तथा दक्षिण में तापी नदी बहती है, इस प्रकार यह दोनों को पृथक करती है।
• छोटा नागपुर पठार आद्य महाकल्पी ग्रेनाइट और नाइस (नीस) चट्टानों से बना है। यह पठार प. बंगाल राज्य के पुरुलिया तथा झारखण्ड राज्य के पलामू, धनबाद, गया, हजारीबाग, संथाल, परगना व रांची जिलों में विस्तृत है।
• मालवा का पठार अरावली एवं विन्ध्य शृंखलाओं के मध्य स्थित है। इसकी औसत ऊँचाई 500मी. से 600मी. के मध्य है। जबकि विन्ध्याचल श्रेणी अत्यधिक पुरानी वह वलित मोड़दार पर्वत श्रेणी है। इसकी औसत ऊँचाई 700 से 1200 मी. है। अत: कथन (2) सत्य नहीं है।
B. • दक्कन का पठार त्रिभुजाकार है, यह क्रमश: उत्तर से दक्षिण की ओर (महाराष्ट्र, म.प्र., छत्तीसगढ़, ओडिशा, आन्ध्र प्रदेश, तेलंगाना, कर्नाटक, तमिलनाडु) विस्तृत है।
• पश्चिमी सतपुड़ा, श्रेणी के उत्तर में नर्मदा तथा दक्षिण में तापी नदी बहती है, इस प्रकार यह दोनों को पृथक करती है।
• छोटा नागपुर पठार आद्य महाकल्पी ग्रेनाइट और नाइस (नीस) चट्टानों से बना है। यह पठार प. बंगाल राज्य के पुरुलिया तथा झारखण्ड राज्य के पलामू, धनबाद, गया, हजारीबाग, संथाल, परगना व रांची जिलों में विस्तृत है।
• मालवा का पठार अरावली एवं विन्ध्य शृंखलाओं के मध्य स्थित है। इसकी औसत ऊँचाई 500मी. से 600मी. के मध्य है। जबकि विन्ध्याचल श्रेणी अत्यधिक पुरानी वह वलित मोड़दार पर्वत श्रेणी है। इसकी औसत ऊँचाई 700 से 1200 मी. है। अत: कथन (2) सत्य नहीं है।