Correct Answer:
Option B - वर्तमान में संख्या की दृष्टि से भारत में विश्व की सर्वाधिक बकरियाँ पाई जाती हैं। ‘निर्धनों की कामधेनु’ के नाम से प्रसिद्ध बकरी के दूध में आयरन एवं पोटैशियम की प्रचुर मात्रा रहती है, जिससे इसका दूध तपेदिक (T.B.) अल्सर एवं अतिसार के मरीजों के लिए बहुत लाभदायक होता है। भारत में बकरी की सबसे बड़ी संख्या द्विकाजी नस्ल ‘जमुनापारी’ है, जो न केवल सर्वाधिक दूध देती है, बल्कि मांस के लिए भी उत्तम नस्ल मानी जाती है। भारत की दुधारू बकरियों की नस्लें-जमुनापारी, बरबरी, बीतल तथा झकराना हैं। ज्ञातव्य है कि देश में सर्वाधिक बकरियां एवं भेड़े राजस्थान में पायी जाती हैं। वेंâद्रीय बकरी अनुसंधान संस्थान मख्दूम (मथुरा) में स्थित है।
B. वर्तमान में संख्या की दृष्टि से भारत में विश्व की सर्वाधिक बकरियाँ पाई जाती हैं। ‘निर्धनों की कामधेनु’ के नाम से प्रसिद्ध बकरी के दूध में आयरन एवं पोटैशियम की प्रचुर मात्रा रहती है, जिससे इसका दूध तपेदिक (T.B.) अल्सर एवं अतिसार के मरीजों के लिए बहुत लाभदायक होता है। भारत में बकरी की सबसे बड़ी संख्या द्विकाजी नस्ल ‘जमुनापारी’ है, जो न केवल सर्वाधिक दूध देती है, बल्कि मांस के लिए भी उत्तम नस्ल मानी जाती है। भारत की दुधारू बकरियों की नस्लें-जमुनापारी, बरबरी, बीतल तथा झकराना हैं। ज्ञातव्य है कि देश में सर्वाधिक बकरियां एवं भेड़े राजस्थान में पायी जाती हैं। वेंâद्रीय बकरी अनुसंधान संस्थान मख्दूम (मथुरा) में स्थित है।