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Q: भारत में ‘न्यायिक सक्रियता’ सम्बन्धित है
  • A. प्रतिबद्ध न्यायपालिका से
  • B. न्यायिक समीक्षा से
  • C. न्यायिक स्वतन्त्रता से
  • D. जनहित याचिका से
Correct Answer: Option D - भारत में ‘न्यायिक सक्रियता’ का सम्बन्ध जनहित याचिका से है। न्यायिक सक्रियता का अर्थ है- न्यायपालिका द्वारा सरकार के दो अन्य अंगों (विधायिका एवं कार्यपालिका) को अपने संवैधानिक दायित्वों के पालन के लिए बाध्य करना। भारत में न्यायिक सक्रियता का सिद्धांत 1970 के दशक में आया। न्यायमूर्ति वी.आर. कृष्ण अय्यर, न्यायमूर्ति पी.एन.भगवती, न्यायमूर्ति ओ. चिन्नप्पा रेड्डी तथा न्यायमूर्ति डी.ए. देसाई ने देश में न्यायिक सक्रियता की नींव रखी।
D. भारत में ‘न्यायिक सक्रियता’ का सम्बन्ध जनहित याचिका से है। न्यायिक सक्रियता का अर्थ है- न्यायपालिका द्वारा सरकार के दो अन्य अंगों (विधायिका एवं कार्यपालिका) को अपने संवैधानिक दायित्वों के पालन के लिए बाध्य करना। भारत में न्यायिक सक्रियता का सिद्धांत 1970 के दशक में आया। न्यायमूर्ति वी.आर. कृष्ण अय्यर, न्यायमूर्ति पी.एन.भगवती, न्यायमूर्ति ओ. चिन्नप्पा रेड्डी तथा न्यायमूर्ति डी.ए. देसाई ने देश में न्यायिक सक्रियता की नींव रखी।

Explanations:

भारत में ‘न्यायिक सक्रियता’ का सम्बन्ध जनहित याचिका से है। न्यायिक सक्रियता का अर्थ है- न्यायपालिका द्वारा सरकार के दो अन्य अंगों (विधायिका एवं कार्यपालिका) को अपने संवैधानिक दायित्वों के पालन के लिए बाध्य करना। भारत में न्यायिक सक्रियता का सिद्धांत 1970 के दशक में आया। न्यायमूर्ति वी.आर. कृष्ण अय्यर, न्यायमूर्ति पी.एन.भगवती, न्यायमूर्ति ओ. चिन्नप्पा रेड्डी तथा न्यायमूर्ति डी.ए. देसाई ने देश में न्यायिक सक्रियता की नींव रखी।