Correct Answer:
Option D - प्रच्छन्न बेरोजगारी या छिपी हुई बेरोजगारी जिसे अदृश्य बेरोजगारी भी कहते हैं के अन्तर्गत श्रमिक बाहर से तो काम पर लगे हुए प्रतीत होते हैं किन्तु वास्तव में उन श्रमिकों की उस कार्य में आवश्यकता नहीं होती अर्थात् यदि उन श्रमिकों को उस कार्य से निकाल दिया जाए तो कुल उत्पादन पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता है। इसमें ज्यादा श्रमिक एक ही व्यवसाय में संलग्न होते हैं जितना कि अपेक्षित रूप से होना चाहिए। इन श्रमिकों की सीमान्त उत्पादकता शून्य अथवा नगण्य होती है। कृषि में इस प्रकार की बेरोजगारी की प्रधानता है तथा यह मुख्यत: ग्रामीण क्षेत्र से जुड़ा है।
D. प्रच्छन्न बेरोजगारी या छिपी हुई बेरोजगारी जिसे अदृश्य बेरोजगारी भी कहते हैं के अन्तर्गत श्रमिक बाहर से तो काम पर लगे हुए प्रतीत होते हैं किन्तु वास्तव में उन श्रमिकों की उस कार्य में आवश्यकता नहीं होती अर्थात् यदि उन श्रमिकों को उस कार्य से निकाल दिया जाए तो कुल उत्पादन पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता है। इसमें ज्यादा श्रमिक एक ही व्यवसाय में संलग्न होते हैं जितना कि अपेक्षित रूप से होना चाहिए। इन श्रमिकों की सीमान्त उत्पादकता शून्य अथवा नगण्य होती है। कृषि में इस प्रकार की बेरोजगारी की प्रधानता है तथा यह मुख्यत: ग्रामीण क्षेत्र से जुड़ा है।