Explanations:
भ्रमरगीत का उपजीव्य ग्रंथ श्रीमद्भागवत महापुराण का दशम् स्कन्ध माना जाता है। सूरदास ने सूरसागर में तीन भ्रमरगीतों की योजना की है। भ्रमर गीत का सर्वप्रथम एक पूर्ण प्रसंग के रूप में वर्णन श्रीमद्भागवत के दशम स्कन्ध के 47वें अध्याय के 12 से 21 श्लोक में मिलता है। हिन्दी साहित्य में भ्रमरगीत परम्परा का प्रवर्तन सूरदास ने किया।