Correct Answer:
Option B - कादम्बरी-कथामुखमिति ग्रन्थस्य मङ्गलाचरणमस्ति-रजोजुषे जन्मनि सत्त्ववृत्तये स्थितौ प्रजानां प्रलये तम: स्पृशे। अजाय सर्गस्थितिनाशहेतवे त्रयीमयाय त्रिगुणात्मने नम:। प्रस्तुत श्लोक कादम्बरी कथामुखम् ग्रन्थ का मङ्गलाचरण है। जिसमें त्रिगुणमयपरब्रह्म की वन्दना की गयी है। मङ्गलाचरण का प्रकार नमस्कारात्मक है। श्लोक का अर्थ इस प्रकार है- सृष्टि की उत्पत्ति के समय रजोगुण (ब्रह्मस्वरूप) स्थितिकाल सत्वगुणयुक्त (विष्णुस्वरूप) और प्रलयकाल तमोगुणयुक्त (शिवस्वरूप) के कारणभूत, वेदत्रयीमय (ऋक्, यजु, साम्) त्रिगुणस्वरूपी एवं अजन्मा (परब्रह्म) को नमस्कार है।
B. कादम्बरी-कथामुखमिति ग्रन्थस्य मङ्गलाचरणमस्ति-रजोजुषे जन्मनि सत्त्ववृत्तये स्थितौ प्रजानां प्रलये तम: स्पृशे। अजाय सर्गस्थितिनाशहेतवे त्रयीमयाय त्रिगुणात्मने नम:। प्रस्तुत श्लोक कादम्बरी कथामुखम् ग्रन्थ का मङ्गलाचरण है। जिसमें त्रिगुणमयपरब्रह्म की वन्दना की गयी है। मङ्गलाचरण का प्रकार नमस्कारात्मक है। श्लोक का अर्थ इस प्रकार है- सृष्टि की उत्पत्ति के समय रजोगुण (ब्रह्मस्वरूप) स्थितिकाल सत्वगुणयुक्त (विष्णुस्वरूप) और प्रलयकाल तमोगुणयुक्त (शिवस्वरूप) के कारणभूत, वेदत्रयीमय (ऋक्, यजु, साम्) त्रिगुणस्वरूपी एवं अजन्मा (परब्रह्म) को नमस्कार है।