Correct Answer:
Option A - भगवदगीतानुसारेणनुसारेण रजोगुणात् ‘लोभ:’ संजायते। मद् भगवदगीतानुसारेण के अनुसार रजोगुण से लोभ उत्पन्न होता है। गीता में उपदेश देते हुए श्री कृष्ण कहते हैं-
लोभ: प्रवृत्तिरारम्भ: कर्मणामशम: स्पृहा।
रजस्येतानि जायन्ते विवृद्धे भरतर्षभ।।
हे अर्जुन! रजोगुण बढ़ने पर लोभ, प्रवृति, स्वार्थ बुद्धि से कर्मों का सकामभाव से आरम्भ, अशान्ति और विषय भोगों की लालसा- ये सब उत्पन्न होते हैं। उपर्युक्त पंक्ति श्रीमद् भगवदगीता के चौदहवें अध्याय से उद्धृत है। इस अध्याय का नाम ‘ गुणत्रय विभाग योग’ है।
A. भगवदगीतानुसारेणनुसारेण रजोगुणात् ‘लोभ:’ संजायते। मद् भगवदगीतानुसारेण के अनुसार रजोगुण से लोभ उत्पन्न होता है। गीता में उपदेश देते हुए श्री कृष्ण कहते हैं-
लोभ: प्रवृत्तिरारम्भ: कर्मणामशम: स्पृहा।
रजस्येतानि जायन्ते विवृद्धे भरतर्षभ।।
हे अर्जुन! रजोगुण बढ़ने पर लोभ, प्रवृति, स्वार्थ बुद्धि से कर्मों का सकामभाव से आरम्भ, अशान्ति और विषय भोगों की लालसा- ये सब उत्पन्न होते हैं। उपर्युक्त पंक्ति श्रीमद् भगवदगीता के चौदहवें अध्याय से उद्धृत है। इस अध्याय का नाम ‘ गुणत्रय विभाग योग’ है।