search
Q: भगवद् गीतानुसारेण रजोगुणात् संजायते
  • A. लोभ:
  • B. प्रमाद:
  • C. मोह:
  • D. अज्ञानम्
Correct Answer: Option A - भगवदगीतानुसारेणनुसारेण रजोगुणात् ‘लोभ:’ संजायते। मद् भगवदगीतानुसारेण के अनुसार रजोगुण से लोभ उत्पन्न होता है। गीता में उपदेश देते हुए श्री कृष्ण कहते हैं- लोभ: प्रवृत्तिरारम्भ: कर्मणामशम: स्पृहा। रजस्येतानि जायन्ते विवृद्धे भरतर्षभ।। हे अर्जुन! रजोगुण बढ़ने पर लोभ, प्रवृति, स्वार्थ बुद्धि से कर्मों का सकामभाव से आरम्भ, अशान्ति और विषय भोगों की लालसा- ये सब उत्पन्न होते हैं। उपर्युक्त पंक्ति श्रीमद् भगवदगीता के चौदहवें अध्याय से उद्धृत है। इस अध्याय का नाम ‘ गुणत्रय विभाग योग’ है।
A. भगवदगीतानुसारेणनुसारेण रजोगुणात् ‘लोभ:’ संजायते। मद् भगवदगीतानुसारेण के अनुसार रजोगुण से लोभ उत्पन्न होता है। गीता में उपदेश देते हुए श्री कृष्ण कहते हैं- लोभ: प्रवृत्तिरारम्भ: कर्मणामशम: स्पृहा। रजस्येतानि जायन्ते विवृद्धे भरतर्षभ।। हे अर्जुन! रजोगुण बढ़ने पर लोभ, प्रवृति, स्वार्थ बुद्धि से कर्मों का सकामभाव से आरम्भ, अशान्ति और विषय भोगों की लालसा- ये सब उत्पन्न होते हैं। उपर्युक्त पंक्ति श्रीमद् भगवदगीता के चौदहवें अध्याय से उद्धृत है। इस अध्याय का नाम ‘ गुणत्रय विभाग योग’ है।

Explanations:

भगवदगीतानुसारेणनुसारेण रजोगुणात् ‘लोभ:’ संजायते। मद् भगवदगीतानुसारेण के अनुसार रजोगुण से लोभ उत्पन्न होता है। गीता में उपदेश देते हुए श्री कृष्ण कहते हैं- लोभ: प्रवृत्तिरारम्भ: कर्मणामशम: स्पृहा। रजस्येतानि जायन्ते विवृद्धे भरतर्षभ।। हे अर्जुन! रजोगुण बढ़ने पर लोभ, प्रवृति, स्वार्थ बुद्धि से कर्मों का सकामभाव से आरम्भ, अशान्ति और विषय भोगों की लालसा- ये सब उत्पन्न होते हैं। उपर्युक्त पंक्ति श्रीमद् भगवदगीता के चौदहवें अध्याय से उद्धृत है। इस अध्याय का नाम ‘ गुणत्रय विभाग योग’ है।