Correct Answer:
Option A - प्रस्तुत पंक्तियाँ मलिक मोहम्मद जायसी द्वारा ‘आखिरी कलाम’ के नाम से फारसी भाषा में छपी थी। यह बाबर के समय में लिखी गयी थी। इसमें बाबर की प्रशंसा है। इस पुस्तक में जायसी ने अपने जन्म के संबंध में लिखा था।
कबीरदास जी हिन्दी साहित्य के निर्गुण भक्ति शाखा के प्रमुख कवि थे। इनकी प्रमुख रचनाएँ - रमैनी, सबद और साखी।
आलम शेख - रीतिकाल के एक हिन्दी कवि थे। इनका प्रारंभिक नाम लालमणि त्रिपाठी था। इनकी रचनाएँ - सुदामाचरित, श्यामसनेही, आलमकेलि आदि है।
A. प्रस्तुत पंक्तियाँ मलिक मोहम्मद जायसी द्वारा ‘आखिरी कलाम’ के नाम से फारसी भाषा में छपी थी। यह बाबर के समय में लिखी गयी थी। इसमें बाबर की प्रशंसा है। इस पुस्तक में जायसी ने अपने जन्म के संबंध में लिखा था।
कबीरदास जी हिन्दी साहित्य के निर्गुण भक्ति शाखा के प्रमुख कवि थे। इनकी प्रमुख रचनाएँ - रमैनी, सबद और साखी।
आलम शेख - रीतिकाल के एक हिन्दी कवि थे। इनका प्रारंभिक नाम लालमणि त्रिपाठी था। इनकी रचनाएँ - सुदामाचरित, श्यामसनेही, आलमकेलि आदि है।