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Q: बच्चों की मौखिक अभिव्यक्ति के विकास का अर्थ यह नहीं है–
  • A. वाद-विवाद में बोझिझक होकर बोलना
  • B. कहानी सुनकर शब्दश: दोहराना
  • C. अपनी कल्पनाओं की मौखिक अभिव्यक्ति
  • D. बातचीत में सक्रिय भागीदारिता का निर्वाह करना
Correct Answer: Option B - कहानी सुनकर शब्दश: दोहराना बच्चों की मौखिक अभिव्यक्ति के विकास का अर्थ नहीं होता है, बल्कि मौलिक विचारों को व्यक्त करना मौखिक अभिव्यक्ति की श्रेणी में आता है। अत: वाद-विवाद में बेझिझक होकर बोलना, अपनी कल्पनाओं की मौखिक अभिव्यक्ति तथा बातचीत में सक्रिय भागीदारिता का निर्वाह करना मौखिक अभिव्यक्ति के विकास के उदाहरण हैं। विकल्प (2) ‘कहानी सुनकर दोहराना’ मौखिक अभिव्यक्ति के विकास का उदाहरण नहीं है।
B. कहानी सुनकर शब्दश: दोहराना बच्चों की मौखिक अभिव्यक्ति के विकास का अर्थ नहीं होता है, बल्कि मौलिक विचारों को व्यक्त करना मौखिक अभिव्यक्ति की श्रेणी में आता है। अत: वाद-विवाद में बेझिझक होकर बोलना, अपनी कल्पनाओं की मौखिक अभिव्यक्ति तथा बातचीत में सक्रिय भागीदारिता का निर्वाह करना मौखिक अभिव्यक्ति के विकास के उदाहरण हैं। विकल्प (2) ‘कहानी सुनकर दोहराना’ मौखिक अभिव्यक्ति के विकास का उदाहरण नहीं है।

Explanations:

कहानी सुनकर शब्दश: दोहराना बच्चों की मौखिक अभिव्यक्ति के विकास का अर्थ नहीं होता है, बल्कि मौलिक विचारों को व्यक्त करना मौखिक अभिव्यक्ति की श्रेणी में आता है। अत: वाद-विवाद में बेझिझक होकर बोलना, अपनी कल्पनाओं की मौखिक अभिव्यक्ति तथा बातचीत में सक्रिय भागीदारिता का निर्वाह करना मौखिक अभिव्यक्ति के विकास के उदाहरण हैं। विकल्प (2) ‘कहानी सुनकर दोहराना’ मौखिक अभिव्यक्ति के विकास का उदाहरण नहीं है।