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Q: बच्चों की लेखन क्षमता का आकलन करते समय आप सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण किसे मानते हैं?
  • A. शुद्ध वर्तनी
  • B. विचार तत्त्व
  • C. व्याकरणिक ज्ञान
Correct Answer: Option B - बच्चों की लेखन क्षमता का आकलन करते समय एक शिक्षक को सर्वाधिक ध्यान विचार तत्त्व पर देना चाहिए क्योंकि बच्चे लिखना सीखने की प्रक्रिया के दौरान अपने विकासात्मक स्तर के अनुसार चित्रों, आड़ी-तिरछी रेखाओं (कीरम-काटे) अक्षर-आकृतियों, स्ववर्तनी (इनवेंटिड स्पेलिंग) और स्व-नियंत्रित लेखन (कनवैंशनल राइटिंग) के माध्यम से सुनी हुई और अपने मन की बातों को अपने तरीके से लिखने का प्रयास करते हैं। बच्चे जैसे-जैसे विकास क्रम में आगे की ओर बढ़ते हैं उनके लेखन में भाषा संगठित, व्याकरणिक शुद्धता, वर्तनी शुद्धता, क्रिया, विशेषण, सर्वनाम आदि का उचित प्रयोग, विराम चिह्नों की सार्थकता आदि की झलक दिखने लगती है। अत: प्राथमिक स्तर पर लेखन क्षमता का आकलन करते समय सर्वप्रथम विचार तत्त्व को महत्त्व दिया जाना चाहिए तत्पश्चात् व्याकरणिक ज्ञान और वर्तनी की शुद्धता आदि पर।
B. बच्चों की लेखन क्षमता का आकलन करते समय एक शिक्षक को सर्वाधिक ध्यान विचार तत्त्व पर देना चाहिए क्योंकि बच्चे लिखना सीखने की प्रक्रिया के दौरान अपने विकासात्मक स्तर के अनुसार चित्रों, आड़ी-तिरछी रेखाओं (कीरम-काटे) अक्षर-आकृतियों, स्ववर्तनी (इनवेंटिड स्पेलिंग) और स्व-नियंत्रित लेखन (कनवैंशनल राइटिंग) के माध्यम से सुनी हुई और अपने मन की बातों को अपने तरीके से लिखने का प्रयास करते हैं। बच्चे जैसे-जैसे विकास क्रम में आगे की ओर बढ़ते हैं उनके लेखन में भाषा संगठित, व्याकरणिक शुद्धता, वर्तनी शुद्धता, क्रिया, विशेषण, सर्वनाम आदि का उचित प्रयोग, विराम चिह्नों की सार्थकता आदि की झलक दिखने लगती है। अत: प्राथमिक स्तर पर लेखन क्षमता का आकलन करते समय सर्वप्रथम विचार तत्त्व को महत्त्व दिया जाना चाहिए तत्पश्चात् व्याकरणिक ज्ञान और वर्तनी की शुद्धता आदि पर।

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बच्चों की लेखन क्षमता का आकलन करते समय एक शिक्षक को सर्वाधिक ध्यान विचार तत्त्व पर देना चाहिए क्योंकि बच्चे लिखना सीखने की प्रक्रिया के दौरान अपने विकासात्मक स्तर के अनुसार चित्रों, आड़ी-तिरछी रेखाओं (कीरम-काटे) अक्षर-आकृतियों, स्ववर्तनी (इनवेंटिड स्पेलिंग) और स्व-नियंत्रित लेखन (कनवैंशनल राइटिंग) के माध्यम से सुनी हुई और अपने मन की बातों को अपने तरीके से लिखने का प्रयास करते हैं। बच्चे जैसे-जैसे विकास क्रम में आगे की ओर बढ़ते हैं उनके लेखन में भाषा संगठित, व्याकरणिक शुद्धता, वर्तनी शुद्धता, क्रिया, विशेषण, सर्वनाम आदि का उचित प्रयोग, विराम चिह्नों की सार्थकता आदि की झलक दिखने लगती है। अत: प्राथमिक स्तर पर लेखन क्षमता का आकलन करते समय सर्वप्रथम विचार तत्त्व को महत्त्व दिया जाना चाहिए तत्पश्चात् व्याकरणिक ज्ञान और वर्तनी की शुद्धता आदि पर।