Correct Answer:
Option C - बाबर साहित्य में बहुत अधिक रूचि लेता था। उसने तुर्की भाषा में अपनी आत्मकथा तुजुक- ए- बाबरी (बाबरनामा) लिखा। बाबरनामा का तीन बार फारसी भाषा में अनुवाद हुआ। बाबरनामा में भारत की तत्कालीन राजनीतिक दशा, भारतीयो के तत्कालीन जीवन स्तर फसलें तथा फूलों का विस्तृत वर्णन मिलता है।
C. बाबर साहित्य में बहुत अधिक रूचि लेता था। उसने तुर्की भाषा में अपनी आत्मकथा तुजुक- ए- बाबरी (बाबरनामा) लिखा। बाबरनामा का तीन बार फारसी भाषा में अनुवाद हुआ। बाबरनामा में भारत की तत्कालीन राजनीतिक दशा, भारतीयो के तत्कालीन जीवन स्तर फसलें तथा फूलों का विस्तृत वर्णन मिलता है।