Explanations:
प्रस्तुत पंक्तियों में बरवै छंद है। यह अर्द्धसम मात्रिक छंद है जिसके विषम चरणों मेें 12 मात्राएं और सम चरणों में 7 मात्राएँ होती है। दोहा, सोरठा, उल्लाला इत्यादि भी अर्द्धसम मात्रिक छंदो की श्रेणी में आते हैं। दोहा - यह अर्द्धसम मात्रिक छन्द है जिसके प्रथम व तृतीय चरण में 13-13 और द्वितीय तथा चतुर्थ चरण में 11-11 मात्राएँ होती है और सम चरणों के अन्त में गुरू - लघु होता है। सोरठा - यह अर्द्धसम मात्रिक छन्द है। यह दोहे का उल्टा है। अर्थात इसके प्रथम तथा तृतीय चरण में 11-11 और द्वितीय तथा चतुर्थ चरण में 13-13 मात्राएँ होती है। • ‘छन्द’ शब्द का सर्वप्रथम उल्लेख ऋग्वेद में मिलता है। छन्द शास्त्र के व्यवस्थित परम्परा का सूत्रपात पिंगलाचार्य के ‘छन्द:सूत्रम्’ से होता है। इसलिए इसे ‘पिंगलशास्त्र’ भी कहते हैं।