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Q: अधोलिखितान् श्लोकान् पठित्वा 25-30 प्रश्नानां विकल्पात्मकोत्तरेभ्य उचिततमम् उत्तरं चित्वा लिखत– स्वे स्वे कर्मण्यभिरत: संसिद्धिं लभते नर:। स्वकर्मनिरत: सिद्धिं यथा विन्दति तच्छृणु।। यत: प्रवृत्तिर्भूतानां येन सर्वमिदं ततम्। स्वकर्मणा तमभ्यचर्य सिद्धिं विन्दति मानव:।। श्रेयान्स्वधर्मो विगुण: परधर्मात्स्वनुष्ठितात्। स्वभावनियतं कर्म कुर्वन्नाप्नोति किल्बिषम्।। ईश्वर: सर्वभूतानां हृद्देशेऽर्जुन तिष्ठति। भ्रामयन्सर्वभूतानि यन्त्रारूढानि मायया।। स्वभावजेन कौन्तेय निबद्ध: स्वेन कर्मणा। कर्तुंनेच्छसि यन्मोहात्करिष्यस्यवशोऽपि तत्।। नर: केन प्रकारेण संसिद्धिं प्राप्नोति?
  • A. तमसेऽभिरत:
  • B. स्वाध्यायेऽभिरत:
  • C. स्वे स्वे कर्मण्यभिरत:
  • D. स्वे स्वे तपसि अभिरत:
Correct Answer: Option C - नर: स्वे स्वे कर्मण्यभिरत संसिद्धिं प्राप्नोति। अर्थात् मनुष्य अपने-अपने कर्मों में लगा हुआ सफलता को प्राप्त करता है। `स्वे-स्वे कर्मण्यभिरत: संसिद्धिं लभते नर:'। अर्थात् अपने-अपने कर्मों में लगा हुआ व्यक्ति अपनी उचित सफलता को प्राप्त करता है।
C. नर: स्वे स्वे कर्मण्यभिरत संसिद्धिं प्राप्नोति। अर्थात् मनुष्य अपने-अपने कर्मों में लगा हुआ सफलता को प्राप्त करता है। `स्वे-स्वे कर्मण्यभिरत: संसिद्धिं लभते नर:'। अर्थात् अपने-अपने कर्मों में लगा हुआ व्यक्ति अपनी उचित सफलता को प्राप्त करता है।

Explanations:

नर: स्वे स्वे कर्मण्यभिरत संसिद्धिं प्राप्नोति। अर्थात् मनुष्य अपने-अपने कर्मों में लगा हुआ सफलता को प्राप्त करता है। `स्वे-स्वे कर्मण्यभिरत: संसिद्धिं लभते नर:'। अर्थात् अपने-अपने कर्मों में लगा हुआ व्यक्ति अपनी उचित सफलता को प्राप्त करता है।