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Q: अधोलिखितान् श्लोकान् पठित्वा 25-30 प्रश्नानां विकल्पात्मकोत्तरेभ्य उचिततमम् उत्तरं चित्वा लिखत– स्वे स्वे कर्मण्यभिरत: संसिद्धिं लभते नर:। स्वकर्मनिरत: सिद्धिं यथा विन्दति तच्छृणु।। यत: प्रवृत्तिर्भूतानां येन सर्वमिदं ततम्। स्वकर्मणा तमभ्यचर्य सिद्धिं विन्दति मानव:।। श्रेयान्स्वधर्मो विगुण: परधर्मात्स्वनुष्ठितात्। स्वभावनियतं कर्म कुर्वन्नाप्नोति किल्बिषम्।। ईश्वर: सर्वभूतानां हृद्देशेऽर्जुन तिष्ठति। भ्रामयन्सर्वभूतानि यन्त्रारूढानि मायया।। स्वभावजेन कौन्तेय निबद्ध: स्वेन कर्मणा। कर्तुंनेच्छसि यन्मोहात्करिष्यस्यवशोऽपि तत्।। ईश्वर: कुत्र वर्तते?
  • A. सर्वभूतानां हृद्देशे
  • B. सर्वमानवानामेव हृद्देशे
  • C. सर्वदेवानामेव हृद्देशे
  • D. ज्योतिर्लिङ्गेषु
Correct Answer: Option A - ईश्वर: सर्वभूतानां हृद्देशे वर्तते। अर्थात् ईश्वर सभी प्राणियों के हृदय में रहता है। ईश्वर: सर्वभूतानां हृद्देशेऽर्जुन तिष्ठति। भ्रामयन्सर्वभूतानि यन्त्रारूढानि मायया।। अर्थात् हे अर्जुन! सभी प्राणियों के हृदय में रहता है तथा माया रूप यन्त्र से आरुढ़ होकर सभी प्राणियों में घूमता रहता है।
A. ईश्वर: सर्वभूतानां हृद्देशे वर्तते। अर्थात् ईश्वर सभी प्राणियों के हृदय में रहता है। ईश्वर: सर्वभूतानां हृद्देशेऽर्जुन तिष्ठति। भ्रामयन्सर्वभूतानि यन्त्रारूढानि मायया।। अर्थात् हे अर्जुन! सभी प्राणियों के हृदय में रहता है तथा माया रूप यन्त्र से आरुढ़ होकर सभी प्राणियों में घूमता रहता है।

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ईश्वर: सर्वभूतानां हृद्देशे वर्तते। अर्थात् ईश्वर सभी प्राणियों के हृदय में रहता है। ईश्वर: सर्वभूतानां हृद्देशेऽर्जुन तिष्ठति। भ्रामयन्सर्वभूतानि यन्त्रारूढानि मायया।। अर्थात् हे अर्जुन! सभी प्राणियों के हृदय में रहता है तथा माया रूप यन्त्र से आरुढ़ होकर सभी प्राणियों में घूमता रहता है।