Explanations:
श्रेयान्स्वधर्मो.................। स्वभावनियतं कर्म कुर्वन्.................।। अस्मिन् श्लोके प्रयुक्तं ``कर्म'' इति नपुंसकलिङ्गे। अर्थात् इस श्लोक में प्रयुक्त `कर्म' यह नपुंसललिङ्ग में प्रयुक्त है। यह नकारान्त नपुंसकलिङ्ग में प्रयुक्त होता है इसका मूल प्रातिपादिक कर्मन् है। अत: इसका रूप– कर्म कर्मणि कर्माणि कर्म कर्मणी कर्माणि।