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Q: अधोलिखितान् पद्यान् पठित्वा प्रश्नानां (25-30) विकल्पात्मकोत्तरेभ्य: उचिततमं उत्तरं चिनुत । जाड्यं धियो हरति सिञचति वाचि सत्यम्, मानोन्नतिं दिशति पापमपाकरोति। चेत: पसादयति दिक्षु तनोति कीर्तिम्, सत्सङ्गति: कथय किं न करोति पुंसाम् ।।1।। सर्पा: पिबन्ति पवनं न च दुर्बलास्ते, शुष्के : तृणै: वनगजा: बलिन: भवन्ति। सन्तोष एव पुरुषस्य परं निधानम् ।।2।। परिवर्तिनि संसारे मृत: को वा न जायते। स जातो येन जातेन याति वंश: समुन्नतिम्। मृग-मीन-सज्जनानां तृण-जल-सन्तोष विहत वृत्तीनाम्। लुब्धक-धीवर-पिशुना निष्कारणवैरिणो जगति।।4।। वैरणा नहि संदध्यात् सुश्लिष्टनापि सन्धिना। सुतप्तमपि पानीयं शमयत्येव पावकम् ।।5।। पुरुषस्य परं निधानं किं भवति।
  • A. व्यसनम्
  • B. भौतिकसाधनानि
  • C. सन्तोष:
  • D. धनम्
Correct Answer: Option C - पुरूषस्य परं निधानं सन्तोषं भवति। अर्थात् पुरूष का पर विराम् स्थान (पडाव) सन्तोष होता है। ‘सन्तोष’ एवं पुरूषस्य परं निधानम्’ सन्तोष ही पुरूष का परम पडाव या विराम स्थान है जहाँ पहुँचकर मनुष्य अपनी ऐच्छिक क्रियाओं से मुक्त हो जाता है।
C. पुरूषस्य परं निधानं सन्तोषं भवति। अर्थात् पुरूष का पर विराम् स्थान (पडाव) सन्तोष होता है। ‘सन्तोष’ एवं पुरूषस्य परं निधानम्’ सन्तोष ही पुरूष का परम पडाव या विराम स्थान है जहाँ पहुँचकर मनुष्य अपनी ऐच्छिक क्रियाओं से मुक्त हो जाता है।

Explanations:

पुरूषस्य परं निधानं सन्तोषं भवति। अर्थात् पुरूष का पर विराम् स्थान (पडाव) सन्तोष होता है। ‘सन्तोष’ एवं पुरूषस्य परं निधानम्’ सन्तोष ही पुरूष का परम पडाव या विराम स्थान है जहाँ पहुँचकर मनुष्य अपनी ऐच्छिक क्रियाओं से मुक्त हो जाता है।