Correct Answer:
Option A - अतिशयोक्ति-अलंकारस्य लक्षणमस्ति- सिद्धत्वेऽध्यवसायस्य.....।
अर्थात् अतिशयोक्ति-अलंकार का लक्षण है- सिद्धत्वेऽध्यवसायस्यातिशयोक्तिर्निगद्यते (अध्यवसाय के सिद्ध होने पर अतिशयोक्ति अलङ्कार होता है)
अध्यवसाय- विषयी (उपमान) के द्वारा विषय (उपमेय) का निगरण करके दोनों के पारस्परिक अभेद ज्ञान को ही अध्यवसाय कहते हैं। इस अध्यवसाय के सिद्ध अर्थात् निश्चित होने पर ही अतिशयोक्ति होती है।
उदाहरण–
कथमुपरि कलापिन: कलापो,
विलसति तस्य तलेष्टमीन्दुखण्डम्।
कुवलययुगलं ततो विलोकं,
तिलकुसुमं तदध: प्रवालमस्यात्।। (विश्वनाथ:)
A. अतिशयोक्ति-अलंकारस्य लक्षणमस्ति- सिद्धत्वेऽध्यवसायस्य.....।
अर्थात् अतिशयोक्ति-अलंकार का लक्षण है- सिद्धत्वेऽध्यवसायस्यातिशयोक्तिर्निगद्यते (अध्यवसाय के सिद्ध होने पर अतिशयोक्ति अलङ्कार होता है)
अध्यवसाय- विषयी (उपमान) के द्वारा विषय (उपमेय) का निगरण करके दोनों के पारस्परिक अभेद ज्ञान को ही अध्यवसाय कहते हैं। इस अध्यवसाय के सिद्ध अर्थात् निश्चित होने पर ही अतिशयोक्ति होती है।
उदाहरण–
कथमुपरि कलापिन: कलापो,
विलसति तस्य तलेष्टमीन्दुखण्डम्।
कुवलययुगलं ततो विलोकं,
तिलकुसुमं तदध: प्रवालमस्यात्।। (विश्वनाथ:)