Correct Answer:
Option D - अत: परीक्ष्य कर्तव्यं विशेषात् सङ्गतं रह:।
अज्ञात हृदयेष्वेवं वैरीभवति सौहृदयम्।।
यह उक्ति शार्ङ्गरव की है। अर्थात्- किसी प्रकार की भी मित्रता परीक्षा करके ही करनी चाहिए।
यह ‘अभिज्ञानशाकुन्तलम्’ नाटक के पञ्चम अङ्क से लिया गया है।
D. अत: परीक्ष्य कर्तव्यं विशेषात् सङ्गतं रह:।
अज्ञात हृदयेष्वेवं वैरीभवति सौहृदयम्।।
यह उक्ति शार्ङ्गरव की है। अर्थात्- किसी प्रकार की भी मित्रता परीक्षा करके ही करनी चाहिए।
यह ‘अभिज्ञानशाकुन्तलम्’ नाटक के पञ्चम अङ्क से लिया गया है।