Correct Answer:
Option B - α -किरणे α - कणो से मिलकर बनी होती है हिलियम परमाणु के नाभिक को α - कण कहा जाता है अतः α - किरणे हीलियम परमाणु के नाभिक से बनी होती है। α - किरणो का द्रव्यमान प्रोटॉन के द्रव्यमान का चार गुना होता है
इसकी भेदन क्षमता बहुत कम होती है यह 0.1 मिमी मोटी एल्युमिनियम की चादर को भी आसानी से भेदने मे समर्थ रहती है जबकि β- किरणो की भेदन क्षमता, α - किरणो से अधिक होती है β- किरणो कि भेदन क्षमता, α- किरणो की भेदन क्षमता से 100 गुना अधिक होती है ये 10 मिमी एल्युमिनियम की चादर को पार कर सकती है तथा γ- किरणो की भेदन क्षमता बहुत अधिक होती है इसकी भेदन क्षमता α- किरण और β- किरण दोनो से अधिक होती है इसकी भेदन क्षमता β- किरण की भेदन क्षमता से 10000 गुना अधिक होती है अतः स्पष्ट है कि इनकी प्रवेशीय क्षमता γ > β > α होगी।
B. α -किरणे α - कणो से मिलकर बनी होती है हिलियम परमाणु के नाभिक को α - कण कहा जाता है अतः α - किरणे हीलियम परमाणु के नाभिक से बनी होती है। α - किरणो का द्रव्यमान प्रोटॉन के द्रव्यमान का चार गुना होता है
इसकी भेदन क्षमता बहुत कम होती है यह 0.1 मिमी मोटी एल्युमिनियम की चादर को भी आसानी से भेदने मे समर्थ रहती है जबकि β- किरणो की भेदन क्षमता, α - किरणो से अधिक होती है β- किरणो कि भेदन क्षमता, α- किरणो की भेदन क्षमता से 100 गुना अधिक होती है ये 10 मिमी एल्युमिनियम की चादर को पार कर सकती है तथा γ- किरणो की भेदन क्षमता बहुत अधिक होती है इसकी भेदन क्षमता α- किरण और β- किरण दोनो से अधिक होती है इसकी भेदन क्षमता β- किरण की भेदन क्षमता से 10000 गुना अधिक होती है अतः स्पष्ट है कि इनकी प्रवेशीय क्षमता γ > β > α होगी।