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Q: अर्थो हि कन्या परकीय एव तामद्य सम्पे्रष्य परिग्रहीतु:। जातो ममायं विशद: प्रकामं प्रत्यर्पितन्यास इवान्तरात्मा।। इत्यत्र किं छन्द?
  • A. शिखरिणी
  • B. इन्द्रवङ्का
  • C. उपजाति
  • D. उपर्युक्तेषु एकस्मादधिक:
  • E. उपर्युक्तेषु किञ्चन् अपि नास्ति
Correct Answer: Option B - अर्थो हि कन्या परकीय ................. इवान्तरात्मा।। श्लोके इन्द्रवङ्का छन्द: अस्ति। प्रस्तुत श्लोक में इन्द्रवङ्का छन्द है। ‘‘स्यादिन्द्रवङ्का यदि तौ जगौ ग:’’ जिस छन्द के प्रत्येक चरण में दो तगण, एक जगण तथा दो गुरुवर्ण क्रमश: हो उसे इन्द्रवङ्का कहते है। इस छन्द के प्रत्येक पाद में 11 अक्षर होते है चारों चरणो में 44 अक्षर होते है पाद के अन्त में यति होती है। ऽऽ । ऽऽ ।।ऽ। ऽऽ अर्थों हि कन्या परकीय एव
B. अर्थो हि कन्या परकीय ................. इवान्तरात्मा।। श्लोके इन्द्रवङ्का छन्द: अस्ति। प्रस्तुत श्लोक में इन्द्रवङ्का छन्द है। ‘‘स्यादिन्द्रवङ्का यदि तौ जगौ ग:’’ जिस छन्द के प्रत्येक चरण में दो तगण, एक जगण तथा दो गुरुवर्ण क्रमश: हो उसे इन्द्रवङ्का कहते है। इस छन्द के प्रत्येक पाद में 11 अक्षर होते है चारों चरणो में 44 अक्षर होते है पाद के अन्त में यति होती है। ऽऽ । ऽऽ ।।ऽ। ऽऽ अर्थों हि कन्या परकीय एव

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अर्थो हि कन्या परकीय ................. इवान्तरात्मा।। श्लोके इन्द्रवङ्का छन्द: अस्ति। प्रस्तुत श्लोक में इन्द्रवङ्का छन्द है। ‘‘स्यादिन्द्रवङ्का यदि तौ जगौ ग:’’ जिस छन्द के प्रत्येक चरण में दो तगण, एक जगण तथा दो गुरुवर्ण क्रमश: हो उसे इन्द्रवङ्का कहते है। इस छन्द के प्रत्येक पाद में 11 अक्षर होते है चारों चरणो में 44 अक्षर होते है पाद के अन्त में यति होती है। ऽऽ । ऽऽ ।।ऽ। ऽऽ अर्थों हि कन्या परकीय एव