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Q: Arabica veriety of coffee was initially introduced for cultivation in which hills? निम्नलिखित में से किन पहाडि़यों में कॉफी की अरेबिका किस्म को आरम्भिक तौर पर शुरू किया गया था?
  • A. Baba Budan Hills /बाबा बूदन की पहाडि़याँ
  • B. Anamalai Hills/अन्नामलाई की पहाडि़याँ
  • C. Nilgiri Hills /नीलगिरी की पहाडि़याँ
  • D. More than one of the above/ उपर्युक्त में से एक से अधिक
  • E. None of the above/उपर्युक्त में से कोई नहीं
Correct Answer: Option A - कहवा का पौधा अबीसीनिया का मूल पौधा है जिसके बीज बाबा बूदान साहब द्वारा सत्रहवीं सदी में यमन से लाया गया था। हमारे देश में अरेबिका किस्म की कॉफी पैदा की जाती है। इसकी कृषि की शुरूआत बाबा बूदन पहाडि़यों से हुई। बाद में अंग्रेजों द्वारा 1826 ई. में चिकमंगलूर (कर्नाटक) तथा इसके बाद वेनाड एवं शेवरॉय और नीलगिरी में इसकी व्यवसायिक कृषि की शुरूआत की गयी। कहवा की तीन किस्में हैं- अरेबिका, रोबस्ता व लिबेरिका। भारत अधिकतर उत्तम किस्म की ‘अरेबिका’ कॉफी का उत्पादन करता है। कर्नाटक, केरल व तमिलनाडु में पश्चिमी घाट की उच्च भूमि पर इसकी कृषि की जाती है।
A. कहवा का पौधा अबीसीनिया का मूल पौधा है जिसके बीज बाबा बूदान साहब द्वारा सत्रहवीं सदी में यमन से लाया गया था। हमारे देश में अरेबिका किस्म की कॉफी पैदा की जाती है। इसकी कृषि की शुरूआत बाबा बूदन पहाडि़यों से हुई। बाद में अंग्रेजों द्वारा 1826 ई. में चिकमंगलूर (कर्नाटक) तथा इसके बाद वेनाड एवं शेवरॉय और नीलगिरी में इसकी व्यवसायिक कृषि की शुरूआत की गयी। कहवा की तीन किस्में हैं- अरेबिका, रोबस्ता व लिबेरिका। भारत अधिकतर उत्तम किस्म की ‘अरेबिका’ कॉफी का उत्पादन करता है। कर्नाटक, केरल व तमिलनाडु में पश्चिमी घाट की उच्च भूमि पर इसकी कृषि की जाती है।

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कहवा का पौधा अबीसीनिया का मूल पौधा है जिसके बीज बाबा बूदान साहब द्वारा सत्रहवीं सदी में यमन से लाया गया था। हमारे देश में अरेबिका किस्म की कॉफी पैदा की जाती है। इसकी कृषि की शुरूआत बाबा बूदन पहाडि़यों से हुई। बाद में अंग्रेजों द्वारा 1826 ई. में चिकमंगलूर (कर्नाटक) तथा इसके बाद वेनाड एवं शेवरॉय और नीलगिरी में इसकी व्यवसायिक कृषि की शुरूआत की गयी। कहवा की तीन किस्में हैं- अरेबिका, रोबस्ता व लिबेरिका। भारत अधिकतर उत्तम किस्म की ‘अरेबिका’ कॉफी का उत्पादन करता है। कर्नाटक, केरल व तमिलनाडु में पश्चिमी घाट की उच्च भूमि पर इसकी कृषि की जाती है।