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Q: Apabharansha style painting are found in which of these manuscript? अपभ्रंश शैली के चित्र इनमें से किन पोथियों में प्राप्त होती है?
  • A. Gita Govinda/गीतगोविन्द
  • B. Natyashastra/नाट्यशास्त्र
  • C. Shadanga/षडंग
  • D. Chitrasutra/चित्रसूत्र
Correct Answer: Option A - अपभ्रंश और जैन दोनों शैलियों के सार्थक नामकरण के सन्दर्भ में 1451 ई. का बसंत विलास, गीत गोविन्द, बाल-गोपाल स्तुति, दुर्गासप्तसती और रति रहस्य आदि पोथियाँ प्राप्त हैं। 7वीं शताब्दी से ही गुजरात और मारवाड़ में इस शैली के चित्रों का निर्माण होने लगा था। • सर्वप्रथम अहमदाबाद के श्री साराभाई मणिकलाल ने ‘चित्रकल्पद्रुम’ (कल्पसूत्र) नामक एक महत्वपूर्ण ग्रन्थ प्रकाशित किया है। जिसमें अपभ्रंश शैली के सादे व रंगीन सैकड़ों चित्र हैं। • नाट्य शास्त्र (प्रथम शताब्दी ई.पू.) में लिखा गया ग्रन्थ है। कला शब्द का प्रयोग सर्वप्रथम इसी में किया गया। • चित्र सूत्र का उल्लेख विष्णु धर्मोत्तर पुराण में है जो भारतीय चित्रकला के प्रौढ़ परम्परा को दर्शित करने वाला एक मात्र ग्रन्थ है। • षडांग में यशोधर पण्डित ने चित्रकला के छ: अंग बताये हैं।
A. अपभ्रंश और जैन दोनों शैलियों के सार्थक नामकरण के सन्दर्भ में 1451 ई. का बसंत विलास, गीत गोविन्द, बाल-गोपाल स्तुति, दुर्गासप्तसती और रति रहस्य आदि पोथियाँ प्राप्त हैं। 7वीं शताब्दी से ही गुजरात और मारवाड़ में इस शैली के चित्रों का निर्माण होने लगा था। • सर्वप्रथम अहमदाबाद के श्री साराभाई मणिकलाल ने ‘चित्रकल्पद्रुम’ (कल्पसूत्र) नामक एक महत्वपूर्ण ग्रन्थ प्रकाशित किया है। जिसमें अपभ्रंश शैली के सादे व रंगीन सैकड़ों चित्र हैं। • नाट्य शास्त्र (प्रथम शताब्दी ई.पू.) में लिखा गया ग्रन्थ है। कला शब्द का प्रयोग सर्वप्रथम इसी में किया गया। • चित्र सूत्र का उल्लेख विष्णु धर्मोत्तर पुराण में है जो भारतीय चित्रकला के प्रौढ़ परम्परा को दर्शित करने वाला एक मात्र ग्रन्थ है। • षडांग में यशोधर पण्डित ने चित्रकला के छ: अंग बताये हैं।

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अपभ्रंश और जैन दोनों शैलियों के सार्थक नामकरण के सन्दर्भ में 1451 ई. का बसंत विलास, गीत गोविन्द, बाल-गोपाल स्तुति, दुर्गासप्तसती और रति रहस्य आदि पोथियाँ प्राप्त हैं। 7वीं शताब्दी से ही गुजरात और मारवाड़ में इस शैली के चित्रों का निर्माण होने लगा था। • सर्वप्रथम अहमदाबाद के श्री साराभाई मणिकलाल ने ‘चित्रकल्पद्रुम’ (कल्पसूत्र) नामक एक महत्वपूर्ण ग्रन्थ प्रकाशित किया है। जिसमें अपभ्रंश शैली के सादे व रंगीन सैकड़ों चित्र हैं। • नाट्य शास्त्र (प्रथम शताब्दी ई.पू.) में लिखा गया ग्रन्थ है। कला शब्द का प्रयोग सर्वप्रथम इसी में किया गया। • चित्र सूत्र का उल्लेख विष्णु धर्मोत्तर पुराण में है जो भारतीय चित्रकला के प्रौढ़ परम्परा को दर्शित करने वाला एक मात्र ग्रन्थ है। • षडांग में यशोधर पण्डित ने चित्रकला के छ: अंग बताये हैं।