Explanations:
सूझ या अन्तर्दृष्टि का सिद्धांत देने का श्रेय जर्मन मनोवैज्ञानिक वोल्फगैंग कोहलर को है जिसने अपनी पुस्तक ‘Mentality of opes’ में वर्ष 1925 में प्रस्तुत किया है। कोहलर ने सूझ के सिद्धांत का प्रयोग वनमानुष या सुल्तान नामक ‘‘चिम्पांजी’’ पर किया था। कोहलर के अनुसार ‘‘कल्पना जितनी अधिक होगी सूझ की क्षमता का विकास भी उतना ही अधिक होगा।’’