Correct Answer:
Option B - लेखाकन में लेखा करते समय कई प्रकार की अशुद्धियां घटित होती हैं। जैसे-
(1) सैद्धांतिक अशुद्धियां- ऐसी अशुद्धिया जो दोहरा लेखा प्रणाली के नियमों का ठीक-ठीक पालन न करने के कारण होती है। जैसे आगम एवं पूँजीगत मदों में भेद न कर पाना।
(2) लोप अशुद्धि या छूट जाने वाली अशुद्धियां- ऐसी अशुद्धियां जिनका लेखा रोजनामचा एवं सहायक बहियों में होने से पूर्णत: छूट जाता है तथा ऐसी अशुद्धि का प्रभाव तल पट पर नहीं पड़ेगा।
(3) हिसाब कि अशुद्धि- ऐसी अशुद्धियाँ जो गलत जोड़ने, गलत घटाने, गलत शेष निकालने अथवा असावधानी के कारण होती है।
B. लेखाकन में लेखा करते समय कई प्रकार की अशुद्धियां घटित होती हैं। जैसे-
(1) सैद्धांतिक अशुद्धियां- ऐसी अशुद्धिया जो दोहरा लेखा प्रणाली के नियमों का ठीक-ठीक पालन न करने के कारण होती है। जैसे आगम एवं पूँजीगत मदों में भेद न कर पाना।
(2) लोप अशुद्धि या छूट जाने वाली अशुद्धियां- ऐसी अशुद्धियां जिनका लेखा रोजनामचा एवं सहायक बहियों में होने से पूर्णत: छूट जाता है तथा ऐसी अशुद्धि का प्रभाव तल पट पर नहीं पड़ेगा।
(3) हिसाब कि अशुद्धि- ऐसी अशुद्धियाँ जो गलत जोड़ने, गलत घटाने, गलत शेष निकालने अथवा असावधानी के कारण होती है।