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Q: अजंता गुफा संख्या एक का चित्र है–
  • A. बुद्ध का जन्म
  • B. सोते हुए बुद्ध
  • C. वङ्कापाणि
  • D. रागा और रागिनी
Correct Answer: Option C - • अजंता गुफा संख्या-1 का प्रसिद्ध चित्र वङ्कापाणि है। • अजंता गुफा संख्या-1 के उल्लेखनीय चित्र- शिवि जातक की कथा, वङ्कापाणि तथा पद्मपाणिबोधिसत्व, मारविजय, नागराज शंखपाल, नागराज की सभा का दृश्य, चालुक्य राजा पुलकेशियन II के दरबार में ईरानी राजदूत, श्रावस्ती का चमत्कार, महाजनक का वैराग्य, नृत्यवादन, बैलों की लड़ाई, चींटियों के पहाड़ पर साँप की तपस्या तथा छतों में कमल व हंसों के अलंकरण व प्रेमी युगलों के अप्रितम चित्र है। • ईरानी दैत्य, काली राजकुमारी, मारविजय आदि भी चित्रित हैं। • एक कला विद्वान का कथन है कि – सिस्टाइन पूजागृह में विंची द्वारा निर्मित अन्तिम भोज चित्र में ईसा की आकृति जिस भव्यता और आत्म-त्याग के साथ विश्व कल्याण की भावना प्रकट करती है, ठीक वही प्रभाव अजन्ता के बोधिसत्व पद्मपाणि के चित्र का है।
C. • अजंता गुफा संख्या-1 का प्रसिद्ध चित्र वङ्कापाणि है। • अजंता गुफा संख्या-1 के उल्लेखनीय चित्र- शिवि जातक की कथा, वङ्कापाणि तथा पद्मपाणिबोधिसत्व, मारविजय, नागराज शंखपाल, नागराज की सभा का दृश्य, चालुक्य राजा पुलकेशियन II के दरबार में ईरानी राजदूत, श्रावस्ती का चमत्कार, महाजनक का वैराग्य, नृत्यवादन, बैलों की लड़ाई, चींटियों के पहाड़ पर साँप की तपस्या तथा छतों में कमल व हंसों के अलंकरण व प्रेमी युगलों के अप्रितम चित्र है। • ईरानी दैत्य, काली राजकुमारी, मारविजय आदि भी चित्रित हैं। • एक कला विद्वान का कथन है कि – सिस्टाइन पूजागृह में विंची द्वारा निर्मित अन्तिम भोज चित्र में ईसा की आकृति जिस भव्यता और आत्म-त्याग के साथ विश्व कल्याण की भावना प्रकट करती है, ठीक वही प्रभाव अजन्ता के बोधिसत्व पद्मपाणि के चित्र का है।

Explanations:

• अजंता गुफा संख्या-1 का प्रसिद्ध चित्र वङ्कापाणि है। • अजंता गुफा संख्या-1 के उल्लेखनीय चित्र- शिवि जातक की कथा, वङ्कापाणि तथा पद्मपाणिबोधिसत्व, मारविजय, नागराज शंखपाल, नागराज की सभा का दृश्य, चालुक्य राजा पुलकेशियन II के दरबार में ईरानी राजदूत, श्रावस्ती का चमत्कार, महाजनक का वैराग्य, नृत्यवादन, बैलों की लड़ाई, चींटियों के पहाड़ पर साँप की तपस्या तथा छतों में कमल व हंसों के अलंकरण व प्रेमी युगलों के अप्रितम चित्र है। • ईरानी दैत्य, काली राजकुमारी, मारविजय आदि भी चित्रित हैं। • एक कला विद्वान का कथन है कि – सिस्टाइन पूजागृह में विंची द्वारा निर्मित अन्तिम भोज चित्र में ईसा की आकृति जिस भव्यता और आत्म-त्याग के साथ विश्व कल्याण की भावना प्रकट करती है, ठीक वही प्रभाव अजन्ता के बोधिसत्व पद्मपाणि के चित्र का है।