Correct Answer:
Option A - ‘‘अज्ञ: सुखमाराध्य: सुखतरमाराध्यते विशेषज्ञ:’’ इस पंक्ति के रचयिता भर्तृहरि हैं। यह सूक्ति वाक्य नीतिशतकम् का है।
अर्थ-अज्ञानी को सुखपूर्वक प्रसन्न किया जा सकता है और विशेषज्ञ अर्थात् सब कुछ जानने वाले को और भी आसानी से प्रसन्न या संतुष्ट किया जा सकता है।
A. ‘‘अज्ञ: सुखमाराध्य: सुखतरमाराध्यते विशेषज्ञ:’’ इस पंक्ति के रचयिता भर्तृहरि हैं। यह सूक्ति वाक्य नीतिशतकम् का है।
अर्थ-अज्ञानी को सुखपूर्वक प्रसन्न किया जा सकता है और विशेषज्ञ अर्थात् सब कुछ जानने वाले को और भी आसानी से प्रसन्न या संतुष्ट किया जा सकता है।