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Q: `ऐश्वर्यतिमिरान्धत्वम्' यह कथन किस ग्रन्थ का है–
  • A. शुकनाशोपदेश (कादम्बरी)
  • B. नीतिशतक
  • C. पञ्चतन्त्र
  • D. मेघदूत
Correct Answer: Option A - ``ऐश्वर्यतिमिरान्धत्वम्'' इसका तात्पर्य है कि ऐश्वर्यरूपी तिमिरान्धत्व अञ्जनरूपी शलाका के उपयोग से भी दूर नहीं किया जा सकता है। यह कथन बाणभट्ट द्वारा रचित शुकनाशोपदेश (कादम्बरी) से लिया गया है।
A. ``ऐश्वर्यतिमिरान्धत्वम्'' इसका तात्पर्य है कि ऐश्वर्यरूपी तिमिरान्धत्व अञ्जनरूपी शलाका के उपयोग से भी दूर नहीं किया जा सकता है। यह कथन बाणभट्ट द्वारा रचित शुकनाशोपदेश (कादम्बरी) से लिया गया है।

Explanations:

``ऐश्वर्यतिमिरान्धत्वम्'' इसका तात्पर्य है कि ऐश्वर्यरूपी तिमिरान्धत्व अञ्जनरूपी शलाका के उपयोग से भी दूर नहीं किया जा सकता है। यह कथन बाणभट्ट द्वारा रचित शुकनाशोपदेश (कादम्बरी) से लिया गया है।