Correct Answer:
Option D - इस्पात धरन सिद्धान्त (Steel beam theory)– जब दोहरे प्रबलित कंक्रीट खण्ड में, सम्पीडन इस्पात का क्षेत्रफल तनन इस्पात के क्षेत्रफल के बराबर अथवा लगभग बराबर हो जाता है, तो अभिकल्पन मितव्ययी नहीं रहता है, क्योंकि सम्पीडन क्षेत्र का कंक्रीट सम्पीडन प्रतिबल लेने में थोड़ा भी सहयोग नहीं देती है। इस दशा में कंक्रीट केवल सम्पीडन तथा तनन इस्पात को अपनी निर्धारित स्थिति में बनाये रखने का कार्य करती है। ऐसे धरनों को इस्पात-धरन सिद्धान्त के अन्तर्गत मानकर अभिकल्पन करना उचित रहता है।
इस्पात-धरन सिद्धान्त के अनुसार–
(i) खण्ड की कंक्रीट को गणना में नहीं लिया जाता है।
(ii) सम्पीडन एवं तनन इस्पात में समान प्रतिबल उत्पन्न होते हैं।
(iii) सम्पीडन तथा तनन इस्पात के क्षेत्रफल बराबर मान लिये जाते हैं।
(iv) सम्पीडन एवं तनन इस्पात में अधिकतम अनुज्ञेय प्रतिबल एक साथ उपजते हैं।
D. इस्पात धरन सिद्धान्त (Steel beam theory)– जब दोहरे प्रबलित कंक्रीट खण्ड में, सम्पीडन इस्पात का क्षेत्रफल तनन इस्पात के क्षेत्रफल के बराबर अथवा लगभग बराबर हो जाता है, तो अभिकल्पन मितव्ययी नहीं रहता है, क्योंकि सम्पीडन क्षेत्र का कंक्रीट सम्पीडन प्रतिबल लेने में थोड़ा भी सहयोग नहीं देती है। इस दशा में कंक्रीट केवल सम्पीडन तथा तनन इस्पात को अपनी निर्धारित स्थिति में बनाये रखने का कार्य करती है। ऐसे धरनों को इस्पात-धरन सिद्धान्त के अन्तर्गत मानकर अभिकल्पन करना उचित रहता है।
इस्पात-धरन सिद्धान्त के अनुसार–
(i) खण्ड की कंक्रीट को गणना में नहीं लिया जाता है।
(ii) सम्पीडन एवं तनन इस्पात में समान प्रतिबल उत्पन्न होते हैं।
(iii) सम्पीडन तथा तनन इस्पात के क्षेत्रफल बराबर मान लिये जाते हैं।
(iv) सम्पीडन एवं तनन इस्पात में अधिकतम अनुज्ञेय प्रतिबल एक साथ उपजते हैं।