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Q: अभयारण्यों के अंदर चरने की अनुमति वो पशुधन के लिए संक्रामक रोगों के विरूद्ध टीकाकरण..............के तहत अधिदिष्ट है।
  • A. पशुओं में संक्रामक एवं संसर्गजन्य रोगों के नियंत्रण तथा रोकथाम अधिनियम, 2009 की धारा 8
  • B. पशु क्रूरता निवारण अधिनियम, 1960 की धारा 35
  • C. वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम 1972 की धारा 33-A
  • D. महामारी रोग अधिनियम, 1897 की धारा 2
Correct Answer: Option C - वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 की धारा 33-A के तहत- (i) मुख्य वन्य जीव संरक्षक अभयारण्य के 5 किमी. के अन्दर या उसके अन्दर रखे गए पशुओं के संचारी रोगों के प्रतिरक्षण के लिए ऐसी रीति में जो विहित की जाए, ऐसे उपाय करेगा। (ii) कोई भी व्यक्ति किसी अभयारण्य में किसी भी पशुधन को प्रतिरक्षित किए बिना न ले जाएगा और न ही चराएगा। अत: अभयारण्यों के अंदर चरने की अनुमति वाले पशुधन के लिए संक्रामक रोगों के विरूद्ध टीकाकरण वन्य जीव संरक्षण अधिनियम 1972 की धारा 33-A के तहत अधिदिष्ट है।
C. वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 की धारा 33-A के तहत- (i) मुख्य वन्य जीव संरक्षक अभयारण्य के 5 किमी. के अन्दर या उसके अन्दर रखे गए पशुओं के संचारी रोगों के प्रतिरक्षण के लिए ऐसी रीति में जो विहित की जाए, ऐसे उपाय करेगा। (ii) कोई भी व्यक्ति किसी अभयारण्य में किसी भी पशुधन को प्रतिरक्षित किए बिना न ले जाएगा और न ही चराएगा। अत: अभयारण्यों के अंदर चरने की अनुमति वाले पशुधन के लिए संक्रामक रोगों के विरूद्ध टीकाकरण वन्य जीव संरक्षण अधिनियम 1972 की धारा 33-A के तहत अधिदिष्ट है।

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वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 की धारा 33-A के तहत- (i) मुख्य वन्य जीव संरक्षक अभयारण्य के 5 किमी. के अन्दर या उसके अन्दर रखे गए पशुओं के संचारी रोगों के प्रतिरक्षण के लिए ऐसी रीति में जो विहित की जाए, ऐसे उपाय करेगा। (ii) कोई भी व्यक्ति किसी अभयारण्य में किसी भी पशुधन को प्रतिरक्षित किए बिना न ले जाएगा और न ही चराएगा। अत: अभयारण्यों के अंदर चरने की अनुमति वाले पशुधन के लिए संक्रामक रोगों के विरूद्ध टीकाकरण वन्य जीव संरक्षण अधिनियम 1972 की धारा 33-A के तहत अधिदिष्ट है।