Explanations:
बीसवीं शताब्दी में अभिव्यंजनावादी कला का उत्थान जर्मनी में हुआ और उसकी तुलना गोथिक कला की गूढ़ भावनात्मकता से की जा सकती है। अभिव्यंजनावादी कला में कलाकार मानवीय शरीर एवं वस्तु के नैसर्गिक रूप को अपनी भावनाओं के अनुकूल विकृत या ऐठनदार रूप में बनाते है।