Correct Answer:
Option A - अभिज्ञानशाकुन्तलमिति नाटके नान्दी ‘अष्टापदा’ (अष्टपदा) अस्ति।
अर्थात् ‘अभिज्ञानशाकुन्तलम्’ इस नाटक में अष्टपदा नान्दी है। कवि कालिदास इस (महाकाव्य) के मङ्गलाचरण ‘या सृष्टि: स्रष्टुराद्या, ....... प्रत्यक्षाभि: प्रपन्नस्तनुभिरवतु वस्ताभिरष्टाभिरीश:’ में भगवान् अष्टमूर्ति शिव की स्तुति की है, इसमें स्रग्धरा छन्द और पत्रावली नान्दी है। अत: प्रश्नानुसार विकल्प (a) सही है, एवं विकल्प (b) द्वादशपदा नान्दी भवभूति रचित ‘उत्तररामचरित्’ नाटक में है, तथा विकल्प (c) और (d) अनुपयुक्त हैं।
नान्दी का लक्षण-
आशीर्वचनसंयुक्ता स्तुतिर्यस्मात्प्रयुज्यते।
देवद्विजनृपादीनां तस्मान्नान्दीति संज्ञिता। (सा० दर्पण)
A. अभिज्ञानशाकुन्तलमिति नाटके नान्दी ‘अष्टापदा’ (अष्टपदा) अस्ति।
अर्थात् ‘अभिज्ञानशाकुन्तलम्’ इस नाटक में अष्टपदा नान्दी है। कवि कालिदास इस (महाकाव्य) के मङ्गलाचरण ‘या सृष्टि: स्रष्टुराद्या, ....... प्रत्यक्षाभि: प्रपन्नस्तनुभिरवतु वस्ताभिरष्टाभिरीश:’ में भगवान् अष्टमूर्ति शिव की स्तुति की है, इसमें स्रग्धरा छन्द और पत्रावली नान्दी है। अत: प्रश्नानुसार विकल्प (a) सही है, एवं विकल्प (b) द्वादशपदा नान्दी भवभूति रचित ‘उत्तररामचरित्’ नाटक में है, तथा विकल्प (c) और (d) अनुपयुक्त हैं।
नान्दी का लक्षण-
आशीर्वचनसंयुक्ता स्तुतिर्यस्मात्प्रयुज्यते।
देवद्विजनृपादीनां तस्मान्नान्दीति संज्ञिता। (सा० दर्पण)