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Q: `अभिज्ञानशाकुन्तलम्' का दुष्यन्त नायक है –
  • A. धीर-प्रशान्त
  • B. धीरोदात्त
  • C. धीर-ललित
  • D. धीरोद्धत
Correct Answer: Option B - `अभिज्ञानशाकुन्तलम्' का नायक दुष्यन्त `धीरोदात्त नायक' है। धीरोदात्त नायक के लिए आवश्यक प्राय: सभी गुण उसमें विद्यमान हैं। धीरोदात्त नायक का लक्षण दशरूपककार ने इस प्रकार किया है – महासत्वोऽतिगम्भीर: क्षमावानविकत्थन:। स्थिरो निगूढाहङ्करो धीरोदात्तो दृढ़व्रत:।। अर्थात् जो बहुत तेजस्वी, अत्यन्त गम्भीर, सहनशील, डींग न हाँकने वाला तथा स्थिर हो, जिसका अहङ्कर प्रकट न हो रहा हो और जिसका व्रत दृढ़ हो, ऐसे नायक को धीरोदात्त नायक कहते हैं। दुष्यन्त में प्राय: ये सभी गुण मिलते हैं।
B. `अभिज्ञानशाकुन्तलम्' का नायक दुष्यन्त `धीरोदात्त नायक' है। धीरोदात्त नायक के लिए आवश्यक प्राय: सभी गुण उसमें विद्यमान हैं। धीरोदात्त नायक का लक्षण दशरूपककार ने इस प्रकार किया है – महासत्वोऽतिगम्भीर: क्षमावानविकत्थन:। स्थिरो निगूढाहङ्करो धीरोदात्तो दृढ़व्रत:।। अर्थात् जो बहुत तेजस्वी, अत्यन्त गम्भीर, सहनशील, डींग न हाँकने वाला तथा स्थिर हो, जिसका अहङ्कर प्रकट न हो रहा हो और जिसका व्रत दृढ़ हो, ऐसे नायक को धीरोदात्त नायक कहते हैं। दुष्यन्त में प्राय: ये सभी गुण मिलते हैं।

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`अभिज्ञानशाकुन्तलम्' का नायक दुष्यन्त `धीरोदात्त नायक' है। धीरोदात्त नायक के लिए आवश्यक प्राय: सभी गुण उसमें विद्यमान हैं। धीरोदात्त नायक का लक्षण दशरूपककार ने इस प्रकार किया है – महासत्वोऽतिगम्भीर: क्षमावानविकत्थन:। स्थिरो निगूढाहङ्करो धीरोदात्तो दृढ़व्रत:।। अर्थात् जो बहुत तेजस्वी, अत्यन्त गम्भीर, सहनशील, डींग न हाँकने वाला तथा स्थिर हो, जिसका अहङ्कर प्रकट न हो रहा हो और जिसका व्रत दृढ़ हो, ऐसे नायक को धीरोदात्त नायक कहते हैं। दुष्यन्त में प्राय: ये सभी गुण मिलते हैं।