Q: ‘अभिज्ञानशाकुन्तलम्’ के चतुर्थ अङ्क में ‘लोको नियम्यत इवात्मदशान्तरेषु’ पद्यांश में अलङ्कार है–
A.
उत्प्रेक्षा
B.
अतिशयोक्ति
C.
उपमा
D.
अर्थान्तरन्यास
Correct Answer:
Option A - ‘अभिज्ञानशाकुन्तलम्’ के चतुर्थ अङ्क में ‘लोको नियम्यत इवात्मदशान्तरेषु’ में उत्प्रेक्षा अलङ्कार है। उत्पे्रक्षा अलङ्कार की परिभाषा इस प्रकार है –
‘‘सम्भावनमथोत्प्रेक्षा प्रकृतस्य समेन यत्।’’
A. ‘अभिज्ञानशाकुन्तलम्’ के चतुर्थ अङ्क में ‘लोको नियम्यत इवात्मदशान्तरेषु’ में उत्प्रेक्षा अलङ्कार है। उत्पे्रक्षा अलङ्कार की परिभाषा इस प्रकार है –
‘‘सम्भावनमथोत्प्रेक्षा प्रकृतस्य समेन यत्।’’
Explanations:
‘अभिज्ञानशाकुन्तलम्’ के चतुर्थ अङ्क में ‘लोको नियम्यत इवात्मदशान्तरेषु’ में उत्प्रेक्षा अलङ्कार है। उत्पे्रक्षा अलङ्कार की परिभाषा इस प्रकार है –
‘‘सम्भावनमथोत्प्रेक्षा प्रकृतस्य समेन यत्।’’
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