Correct Answer:
Option B - अभिज्ञानशाकुन्तले ‘कामी स्वतां पश्यति’ इत्युक्ति: राज्ञ: अस्ति। अर्थात् अभिज्ञानशाकुन्तलम् नाटक में ‘कामी स्वतां पश्यति’ यह उक्ति राजा की है। दुष्यन्त शकुन्तला के सौन्दर्य पर मुग्ध होकर अपनी ही बात सोचता हुआ यह सूक्ति कहता है। यह सूक्ति–...... ‘कामी स्वतां पश्यति।’ अभिज्ञान के द्वितीय अज्र् से अवतरित है इसमें अर्थान्तरन्यास अलंकार , तथा शार्दूलविक्रीडित ‘छन्द’ है। अत: प्रश्नानुसार विकल्प (b) सही है शेष अन्य विकल्प-
(a) विदूषक (माढव्य) राजा का मित्र
(c) महर्षि कण्व शकुन्तला के धर्म-पिता और आश्रम के कुलपति, तथा
(d) शारद्वत महर्षि कण्व (काश्यप) का शिष्य था।
B. अभिज्ञानशाकुन्तले ‘कामी स्वतां पश्यति’ इत्युक्ति: राज्ञ: अस्ति। अर्थात् अभिज्ञानशाकुन्तलम् नाटक में ‘कामी स्वतां पश्यति’ यह उक्ति राजा की है। दुष्यन्त शकुन्तला के सौन्दर्य पर मुग्ध होकर अपनी ही बात सोचता हुआ यह सूक्ति कहता है। यह सूक्ति–...... ‘कामी स्वतां पश्यति।’ अभिज्ञान के द्वितीय अज्र् से अवतरित है इसमें अर्थान्तरन्यास अलंकार , तथा शार्दूलविक्रीडित ‘छन्द’ है। अत: प्रश्नानुसार विकल्प (b) सही है शेष अन्य विकल्प-
(a) विदूषक (माढव्य) राजा का मित्र
(c) महर्षि कण्व शकुन्तला के धर्म-पिता और आश्रम के कुलपति, तथा
(d) शारद्वत महर्षि कण्व (काश्यप) का शिष्य था।