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Q: आदिकाव्ये सर्ग-संख्याऽस्ति–
  • A. पञ्चशतम्
  • B. चतु:शतम्
  • C. षट्शतम्
  • D. त्रिशतम्
Correct Answer: Option A - महर्षि वाल्मीकि कृत आदिकाव्य रामायण में पञ्चशतम् (500) सर्ग संख्या है। इसमें 24000 श्लोक हैं अत: इसे चतुर्विंशतिसाहस्रीसंहिता कहा जाता है। इस विषय में एक श्लोक दृष्टव्य है– ‘‘चतुर्विंशतिसहस्राणि श्लोकनामुक्तवान् ऋषि:। तथा सर्गशतान् पञ्च षट्काण्डानि तथोत्तरम्।।
A. महर्षि वाल्मीकि कृत आदिकाव्य रामायण में पञ्चशतम् (500) सर्ग संख्या है। इसमें 24000 श्लोक हैं अत: इसे चतुर्विंशतिसाहस्रीसंहिता कहा जाता है। इस विषय में एक श्लोक दृष्टव्य है– ‘‘चतुर्विंशतिसहस्राणि श्लोकनामुक्तवान् ऋषि:। तथा सर्गशतान् पञ्च षट्काण्डानि तथोत्तरम्।।

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महर्षि वाल्मीकि कृत आदिकाव्य रामायण में पञ्चशतम् (500) सर्ग संख्या है। इसमें 24000 श्लोक हैं अत: इसे चतुर्विंशतिसाहस्रीसंहिता कहा जाता है। इस विषय में एक श्लोक दृष्टव्य है– ‘‘चतुर्विंशतिसहस्राणि श्लोकनामुक्तवान् ऋषि:। तथा सर्गशतान् पञ्च षट्काण्डानि तथोत्तरम्।।