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Q: आत्मसम्मान आन्दोलन’ के पुरोधा कौन थे?
  • A. सी.पी.अय्यर
  • B. श्री नारायण गुरु
  • C. ई. वी. रामास्वामी नायकर
  • D. उपर्युक्त में से एक से अधिक
  • E. उपर्युक्त में से कोई नहीं
Correct Answer: Option C - आत्मसम्मान आंदोलन (स्वाभिमान आंदोलन) के पुरोधा ई.वी. रामास्वामी नायकर (पेरियार) थे। पेरियार अपने प्रारम्भिक जीवन में संन्यासी थे और संस्कृत शास्त्रों की गंभीरता से अध्ययन करते थे। एक दावत में उन्होंने देखा कि निम्न जातियों तथा उच्च जातियों को अलग-अलग बैठाया गया था। अत: उन्होंने जाति-प्रथा के विरोध में स्वाभिमान आंदोलन शुरू कर दिया। उनका कहना था कि मूल तमिल और द्रविड संस्कृति के असली वाहक अछूत थे जिनका ब्राह्मणों ने अधिग्रहण कर लिया है। पेरियार मनुसंहिता, भगवद्गीता, रामायण आदि ग्रंथो के कटुआलोचक थे।
C. आत्मसम्मान आंदोलन (स्वाभिमान आंदोलन) के पुरोधा ई.वी. रामास्वामी नायकर (पेरियार) थे। पेरियार अपने प्रारम्भिक जीवन में संन्यासी थे और संस्कृत शास्त्रों की गंभीरता से अध्ययन करते थे। एक दावत में उन्होंने देखा कि निम्न जातियों तथा उच्च जातियों को अलग-अलग बैठाया गया था। अत: उन्होंने जाति-प्रथा के विरोध में स्वाभिमान आंदोलन शुरू कर दिया। उनका कहना था कि मूल तमिल और द्रविड संस्कृति के असली वाहक अछूत थे जिनका ब्राह्मणों ने अधिग्रहण कर लिया है। पेरियार मनुसंहिता, भगवद्गीता, रामायण आदि ग्रंथो के कटुआलोचक थे।

Explanations:

आत्मसम्मान आंदोलन (स्वाभिमान आंदोलन) के पुरोधा ई.वी. रामास्वामी नायकर (पेरियार) थे। पेरियार अपने प्रारम्भिक जीवन में संन्यासी थे और संस्कृत शास्त्रों की गंभीरता से अध्ययन करते थे। एक दावत में उन्होंने देखा कि निम्न जातियों तथा उच्च जातियों को अलग-अलग बैठाया गया था। अत: उन्होंने जाति-प्रथा के विरोध में स्वाभिमान आंदोलन शुरू कर दिया। उनका कहना था कि मूल तमिल और द्रविड संस्कृति के असली वाहक अछूत थे जिनका ब्राह्मणों ने अधिग्रहण कर लिया है। पेरियार मनुसंहिता, भगवद्गीता, रामायण आदि ग्रंथो के कटुआलोचक थे।