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Q: ‘‘आशाबन्ध: कुसुमसदृशं प्रायशो ह्यङ्गनानां सद्य:पाति प्रणयिहृदयं विप्रयोगे रुणद्धि’’ इतीयं सूक्तिर्विद्यते
  • A. नीतिशतके
  • B. अभिज्ञानशाकुन्तले
  • C. उत्तररामचरिते
  • D. मेघदूते
Correct Answer: Option D - ‘‘आशाबन्ध: कुसुमसदृशं प्रायशो ह्यङ्गनानां सद्य:पाति प्रणयिहृदयं विप्रयोगे रुणद्धि ’’ इतीयं सूक्ति: मेघदूते विद्यते। यह सूक्ति पूर्व मेघ की है। सूक्ति का भावार्थ है- आशा का बन्धन ही प्रेम से ओत-प्रोत, पुष्प सदृश कोमल तथा वियोग से शीघ्र टूटने वाले अबलाओं के हृदय को प्राय: रोके रहता है।
D. ‘‘आशाबन्ध: कुसुमसदृशं प्रायशो ह्यङ्गनानां सद्य:पाति प्रणयिहृदयं विप्रयोगे रुणद्धि ’’ इतीयं सूक्ति: मेघदूते विद्यते। यह सूक्ति पूर्व मेघ की है। सूक्ति का भावार्थ है- आशा का बन्धन ही प्रेम से ओत-प्रोत, पुष्प सदृश कोमल तथा वियोग से शीघ्र टूटने वाले अबलाओं के हृदय को प्राय: रोके रहता है।

Explanations:

‘‘आशाबन्ध: कुसुमसदृशं प्रायशो ह्यङ्गनानां सद्य:पाति प्रणयिहृदयं विप्रयोगे रुणद्धि ’’ इतीयं सूक्ति: मेघदूते विद्यते। यह सूक्ति पूर्व मेघ की है। सूक्ति का भावार्थ है- आशा का बन्धन ही प्रेम से ओत-प्रोत, पुष्प सदृश कोमल तथा वियोग से शीघ्र टूटने वाले अबलाओं के हृदय को प्राय: रोके रहता है।