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Q: आचार्य रामचंद्र शुक्ल ने किसे ‘सांप्रदायिक’ कहकर साहित्य के क्षेत्र से बाहर रखा?
  • A. सिद्ध और नाथ साहित्य
  • B. संत साहित्य
  • C. सूफी काव्य
  • D. उपर्युक्त में से एक से अधिक
  • E. उपर्युक्त में से कोई नहीं
Correct Answer: Option A - ‘सिद्ध और नाथ साहित्य’ को रामचन्द्र शुक्ल ने ‘साम्प्रदायिक’ कहकर साहित्य के क्षेत्र से बाहर रखा। • ‘‘सिद्धों और योगियों की रचनाओं का जीवन की स्वाभाविक सारणियों, अनुभूतियों और दशाओं से कोई सम्बंध नहीं है। वे साम्प्रदायिक शिक्षा मात्र है, अत: शुद्ध साहित्य की कोटि में नहीं आ सकती।’’ (हिन्दी साहित्य का इतिहास- रामचन्द्र शुक्ल, आदि काल : प्रकरण- 2 अपभ्रंश काव्य)
A. ‘सिद्ध और नाथ साहित्य’ को रामचन्द्र शुक्ल ने ‘साम्प्रदायिक’ कहकर साहित्य के क्षेत्र से बाहर रखा। • ‘‘सिद्धों और योगियों की रचनाओं का जीवन की स्वाभाविक सारणियों, अनुभूतियों और दशाओं से कोई सम्बंध नहीं है। वे साम्प्रदायिक शिक्षा मात्र है, अत: शुद्ध साहित्य की कोटि में नहीं आ सकती।’’ (हिन्दी साहित्य का इतिहास- रामचन्द्र शुक्ल, आदि काल : प्रकरण- 2 अपभ्रंश काव्य)

Explanations:

‘सिद्ध और नाथ साहित्य’ को रामचन्द्र शुक्ल ने ‘साम्प्रदायिक’ कहकर साहित्य के क्षेत्र से बाहर रखा। • ‘‘सिद्धों और योगियों की रचनाओं का जीवन की स्वाभाविक सारणियों, अनुभूतियों और दशाओं से कोई सम्बंध नहीं है। वे साम्प्रदायिक शिक्षा मात्र है, अत: शुद्ध साहित्य की कोटि में नहीं आ सकती।’’ (हिन्दी साहित्य का इतिहास- रामचन्द्र शुक्ल, आदि काल : प्रकरण- 2 अपभ्रंश काव्य)