Correct Answer:
Option B - आचार्य मम्मट ने विरोधाभास अलङ्कार के दस (10) प्रकार माने हैं।
विरोधाभास अलङ्कार का लक्षण - ‘‘विरोध: सोऽविरोधेऽपि विरुद्धत्वेन यद्वच:’’ अर्थात् वास्तव में विरोध न होने पर भी विरुद्ध रूप से जो वर्णन करना होता है वह विरोधाभास अलङ्कार कहलाता है। उदाहरण- गिरयोऽप्यनुन्नतियुजो मरुदप्यचलोऽब्धयोडऽ प्यगम्भीरा:।
विश्वम्भराऽप्यतिलघुर्नरनाथ! तवानितके नियतम् ।।
विरोधाभास के दस प्रकार हैं- जाति के 4, गुण के 3, क्रिया के 2, द्रव्य का एक (1) ।
B. आचार्य मम्मट ने विरोधाभास अलङ्कार के दस (10) प्रकार माने हैं।
विरोधाभास अलङ्कार का लक्षण - ‘‘विरोध: सोऽविरोधेऽपि विरुद्धत्वेन यद्वच:’’ अर्थात् वास्तव में विरोध न होने पर भी विरुद्ध रूप से जो वर्णन करना होता है वह विरोधाभास अलङ्कार कहलाता है। उदाहरण- गिरयोऽप्यनुन्नतियुजो मरुदप्यचलोऽब्धयोडऽ प्यगम्भीरा:।
विश्वम्भराऽप्यतिलघुर्नरनाथ! तवानितके नियतम् ।।
विरोधाभास के दस प्रकार हैं- जाति के 4, गुण के 3, क्रिया के 2, द्रव्य का एक (1) ।