search
Q: आचार्य मम्मट ने विरोधाभास अलङ्कार के प्रकार माने हैं
  • A. आठ
  • B. दस
  • C. ग्यारह
  • D. बारह
Correct Answer: Option B - आचार्य मम्मट ने विरोधाभास अलङ्कार के दस (10) प्रकार माने हैं। विरोधाभास अलङ्कार का लक्षण - ‘‘विरोध: सोऽविरोधेऽपि विरुद्धत्वेन यद्वच:’’ अर्थात् वास्तव में विरोध न होने पर भी विरुद्ध रूप से जो वर्णन करना होता है वह विरोधाभास अलङ्कार कहलाता है। उदाहरण- गिरयोऽप्यनुन्नतियुजो मरुदप्यचलोऽब्धयोडऽ प्यगम्भीरा:। विश्वम्भराऽप्यतिलघुर्नरनाथ! तवानितके नियतम् ।। विरोधाभास के दस प्रकार हैं- जाति के 4, गुण के 3, क्रिया के 2, द्रव्य का एक (1) ।
B. आचार्य मम्मट ने विरोधाभास अलङ्कार के दस (10) प्रकार माने हैं। विरोधाभास अलङ्कार का लक्षण - ‘‘विरोध: सोऽविरोधेऽपि विरुद्धत्वेन यद्वच:’’ अर्थात् वास्तव में विरोध न होने पर भी विरुद्ध रूप से जो वर्णन करना होता है वह विरोधाभास अलङ्कार कहलाता है। उदाहरण- गिरयोऽप्यनुन्नतियुजो मरुदप्यचलोऽब्धयोडऽ प्यगम्भीरा:। विश्वम्भराऽप्यतिलघुर्नरनाथ! तवानितके नियतम् ।। विरोधाभास के दस प्रकार हैं- जाति के 4, गुण के 3, क्रिया के 2, द्रव्य का एक (1) ।

Explanations:

आचार्य मम्मट ने विरोधाभास अलङ्कार के दस (10) प्रकार माने हैं। विरोधाभास अलङ्कार का लक्षण - ‘‘विरोध: सोऽविरोधेऽपि विरुद्धत्वेन यद्वच:’’ अर्थात् वास्तव में विरोध न होने पर भी विरुद्ध रूप से जो वर्णन करना होता है वह विरोधाभास अलङ्कार कहलाता है। उदाहरण- गिरयोऽप्यनुन्नतियुजो मरुदप्यचलोऽब्धयोडऽ प्यगम्भीरा:। विश्वम्भराऽप्यतिलघुर्नरनाथ! तवानितके नियतम् ।। विरोधाभास के दस प्रकार हैं- जाति के 4, गुण के 3, क्रिया के 2, द्रव्य का एक (1) ।