Correct Answer:
Option B - व्याख्या- आचार्य भरत मुनि ने गुणों की संख्या दस मानी है – श्लेष, प्रसाद, समता, समाधि, माधुर्य, ओज, सौकुमार्य, अर्थव्यक्ति, उदारता, कांति) जबकि दण्डी ने (10), वामन ने (20) भोज ने (24) मम्मट, भामह और आनन्द वर्द्धन ने (3) गुणों की संख्या माना है।
B. व्याख्या- आचार्य भरत मुनि ने गुणों की संख्या दस मानी है – श्लेष, प्रसाद, समता, समाधि, माधुर्य, ओज, सौकुमार्य, अर्थव्यक्ति, उदारता, कांति) जबकि दण्डी ने (10), वामन ने (20) भोज ने (24) मम्मट, भामह और आनन्द वर्द्धन ने (3) गुणों की संख्या माना है।