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Q: ‘आँचलिक उपन्यासकार’ की संज्ञा इनमें से किसे दी गई है?
  • A. यशपाल
  • B. जैनेंद्र
  • C. रामवृक्ष बेनीपुरी
  • D. फणीश्वरनाथ रेणु
Correct Answer: Option D - आँचलिक उपन्यासकार के रूप में ‘फणीश्वरनाथ रेणु’ जाने जाते हैं। रेणु के प्रमुख उपन्यास हैं- मैला आँचल, जुलूस, परती परिकथा, दीर्घतपा, कितने चौराहे आदि। अज्ञेय ने रेणु के उपन्यासों में ‘‘एक अखण्ड मानवी विश्वास की चिनगारी सुलगती’’ देखी है। जैनेन्द्र मनोविश्लेषणवादी उपन्यासकार हैं। परख, सुनीता, त्यागपत्र इत्यादि इनकी रचनायें हैं। प्रगतिवादी या मार्क्सवादी विचारधारा के प्रतिनिधि उपन्यासकार ‘यशपाल’ हैं। इनके प्रमुख उपन्यास दादा कामरेड, बारह घण्टे, तेरी मेरी उसकी बात, क्यों फँसे ? इत्यादि हैं।
D. आँचलिक उपन्यासकार के रूप में ‘फणीश्वरनाथ रेणु’ जाने जाते हैं। रेणु के प्रमुख उपन्यास हैं- मैला आँचल, जुलूस, परती परिकथा, दीर्घतपा, कितने चौराहे आदि। अज्ञेय ने रेणु के उपन्यासों में ‘‘एक अखण्ड मानवी विश्वास की चिनगारी सुलगती’’ देखी है। जैनेन्द्र मनोविश्लेषणवादी उपन्यासकार हैं। परख, सुनीता, त्यागपत्र इत्यादि इनकी रचनायें हैं। प्रगतिवादी या मार्क्सवादी विचारधारा के प्रतिनिधि उपन्यासकार ‘यशपाल’ हैं। इनके प्रमुख उपन्यास दादा कामरेड, बारह घण्टे, तेरी मेरी उसकी बात, क्यों फँसे ? इत्यादि हैं।

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आँचलिक उपन्यासकार के रूप में ‘फणीश्वरनाथ रेणु’ जाने जाते हैं। रेणु के प्रमुख उपन्यास हैं- मैला आँचल, जुलूस, परती परिकथा, दीर्घतपा, कितने चौराहे आदि। अज्ञेय ने रेणु के उपन्यासों में ‘‘एक अखण्ड मानवी विश्वास की चिनगारी सुलगती’’ देखी है। जैनेन्द्र मनोविश्लेषणवादी उपन्यासकार हैं। परख, सुनीता, त्यागपत्र इत्यादि इनकी रचनायें हैं। प्रगतिवादी या मार्क्सवादी विचारधारा के प्रतिनिधि उपन्यासकार ‘यशपाल’ हैं। इनके प्रमुख उपन्यास दादा कामरेड, बारह घण्टे, तेरी मेरी उसकी बात, क्यों फँसे ? इत्यादि हैं।