Correct Answer:
Option B - आद्र्रताग्रहीत जल (Hygroscopic water) – यह पानी विद्युत-रासायनिक बलों के कारण मृदा के कणों से संयुक्त रहता है तथा गुरुत्व या केशिकीय बलों के कारण भी यह मृदा के कणों से अलग नहीं होता है। स्थायी गलन बिन्दु के नीचे मृदा में जल आद्र्रताग्राही जल होता है।
केशिकीय जल (Capillary water)– यह पानी आणविक आकर्षण (Molecular attraction) के कारण रन्ध्रों में विद्यमान होता है और पौधे की बढ़ोत्तरी के लिये इसकी जड़ों में उपलब्ध रहता है, जहाँ से यह केशिकीय क्रिया द्वारा पौधे की शाखाओं और पत्तियों तक पहुँचता रहता है।
गुरुत्व जल (Gravity water) – जो पानी मृदा-कणों से गुरुत्व प्रभाव के कारण बह सकता है, स्वतन्त्र या गुरुत्व जल कहलाता है। उचित निकास व्यवस्था होने पर यह जल शीघ्र ही मृदा के कणों से निकल जाता है। इसलिए फसल को नहीं मिल पाता है।
B. आद्र्रताग्रहीत जल (Hygroscopic water) – यह पानी विद्युत-रासायनिक बलों के कारण मृदा के कणों से संयुक्त रहता है तथा गुरुत्व या केशिकीय बलों के कारण भी यह मृदा के कणों से अलग नहीं होता है। स्थायी गलन बिन्दु के नीचे मृदा में जल आद्र्रताग्राही जल होता है।
केशिकीय जल (Capillary water)– यह पानी आणविक आकर्षण (Molecular attraction) के कारण रन्ध्रों में विद्यमान होता है और पौधे की बढ़ोत्तरी के लिये इसकी जड़ों में उपलब्ध रहता है, जहाँ से यह केशिकीय क्रिया द्वारा पौधे की शाखाओं और पत्तियों तक पहुँचता रहता है।
गुरुत्व जल (Gravity water) – जो पानी मृदा-कणों से गुरुत्व प्रभाव के कारण बह सकता है, स्वतन्त्र या गुरुत्व जल कहलाता है। उचित निकास व्यवस्था होने पर यह जल शीघ्र ही मृदा के कणों से निकल जाता है। इसलिए फसल को नहीं मिल पाता है।