A long solenoid of length 40 cm has 500 turns. A current 1.0 amp flows in it. The intensity of magnetic field at its center will be- एक लम्बी परिनालिका की लम्बाई 40 सेमी, लम्बाई में तार के 500 फेरे है। यदि तार में 1.0 एम्पियर की धारा बह रही हैं, तो परिनालिका के भीतर अक्ष पर चुम्बकीय क्षेत्र की तीव्रता होगी-
1556 में दिल्ली को खोने वाला हिंदू शासक कौन था?
दो अंकों वाली एक संख्या के अंकों का योगफल 12 है। इसके अंकों को आपस में बदलने पर प्राप्त संख्या, दी गई संख्या से 18 अधिक है। संख्या ज्ञात कीजिए।
The ––––– is a the narrow zone we find land, water and air together which contains all forms of life.
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A man sold an article for ₹687 by first giving a d% discount on its marked price, and then another discount having the same nominal value (in ₹). If the marked price of the article is ₹1145, then what is the value of d? एक व्यक्ति ने एक वस्तु को इसके अंकित मूल्य पर पहले d% की छूट और फिर उतने ही सममूल्य (₹में) की एक और छूट देकर 687 में बेचा। यदि वस्तु का अंकित मूल्य ₹1145 है, तो d का मान क्या है?
वाहन का पंजीकरण रद्द करने के लिए आवेदन करना होगा।
‘अनुकरणशील: अयं पक्षी’ इति क: कम् कथयति?
निम्नलिखित में से छायावादी रचनाकार कौन हैं?
निर्देश–प्रश्न संख्या (192 से 199) अधोलिखितं गद्यांशं पठित्वा प्रश्नानां विकल्पात्मकेभ्य : उचिततमम् उत्तरं चिनुत। एकस्मिन् विद्यालये नवमकक्षाया: छात्रेषु अकिञ्चन: इतिनामा एक: छात्र: आसीत् । कक्षाया: सर्वे छात्रा: सम्पन्नपरिवारेभ्य: आसन्, परन्तु अकिञ्चनस्य पिता एकस्मिन् कार्यालये चतुर्थश्रेण्या: कर्मकर: आसीत् । इतरान् सम्पन्नान् छात्रान् दृष्ट्वा प्राय: अकिञ्चनस्य मनसि हीनभावना प्राविशत् । स: अचिन्तयत् एतेषां सहपाठिनां जीवनं धनं अस्ति । धिक् मम अभावपूर्णं जीवनम् । मम सहपाठिनां जीवनं पर्वत इव उच्चतं मम च जीवनं धूलिवत् निम्नम् । यदा स एवं चिन्तयति स्म तदैव वैभव:, तस्य सहपाठी, तम् अवदत् भो मित्र ! अहं त्वत: गणितं पठितुम् इच्छामि। किं त्वम् अद्य सायज्रले मम गृहम् आगन्तुं शक्नोषि। अकिञ्चन: वैभवस्य आमन्त्रणं स्वीकृत्य सायज्रले यदा तस्य गृृहम् अगच्छत् । तदा स: अपश्यत् यत् वैभवस्य गृहे माता पितरौ अनुपस्थितौ आस्ताम्। वैभव: तस्मै असूचयत् यत् रात्रौ विलम्बेन एव तौ गृहम् आगच्छत:। वैभवस्य विषादपूर्णं जीवनं दृष्ट्वा अकिञ्चन: अबोधयत् यत् तस्य गृहे मातापित्रौ: अधिकसानिध्येन तस्य एव जीवनं वरम् न तु वैभवस्य।
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